पंचनामा और निरीक्षण रिपोर्ट की अनिवार्यता: विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 135 या अन्य सुसंगत प्रावधानों के तहत किसी भी परिसर में बिजली चोरी का मामला तभी बनता है जब अधिकृत विजिलेंस या विभाग द्वारा मौके पर वैध छापा मारा जाए।
वीडियोग्राफी एवं साक्ष्य नियमानुसार छापेमारी के वक्त मौके पर वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी करना, उपभोक्ता या उसके प्रतिनिधि की उपस्थिति सुनिश्चित करना और उसी समय पंचनामा (Inspection Report) तैयार कर मौके पर ही उपभोक्ता या गवाह के हस्ताक्षर कराना अनिवार्य होता है।
शून्य साक्ष्य (Zero Evidence): यदि विभाग द्वारा न तो कोई छापा मारा गया और न ही कोई पंचनामा तैयार किया गया, तो यह नोटिस स्वतः ही कानून की नजर में शून्य (Null and Void) और दुर्भावनापूर्ण साबित होता है।
इस फर्जी कार्रवाई के खिलाफ तत्काल उठाए जाने वाले कदम
क. अधिशासी अभियंता (Executive Engineer / EE) एवं अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) को औपचारिक प्रत्यावेदन (Representation)
तत्काल प्रभाव से रुड़की डिवीजन के अधिशासी अभियंता (EE) और हरिद्वार वृत्त के अधीक्षण अभियंता (SE) को लिखित आपत्ति दर्ज कराएं।
पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख करें कि कनेक्शन संख्या RD217________ पर बिना किसी पूर्व सूचना, निरीक्षण, वीडियोग्राफी या पंचनामे के यह नोटिस जारी किया गया है।
पूर्व में सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई शिकायतों का हवाला देते हुए स्थानीय SDO, JE और लाइनमैन (चिंकू व अन्य) द्वारा व्यक्तिगत खुन्नस, भ्रष्टाचार और अवैध वसूली (दिए गए पैसों के प्रकरण) की पूरी कहानी लिखित रूप में दर्ज कराएं और इस फर्जी नोटिस को तुरंत निरस्त करने की मांग करें।
ख. उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) और विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) में शिकायत
यदि स्थानीय स्तर पर अधिकारी इस तानाशाही को वापस नहीं लेते हैं, तो आप उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) या राज्य के विद्युत लोकपाल (Electricity Ombudsman) के समक्ष पदीय दुरुपयोग और फर्जी नोटिस के खिलाफ याचिका/शिकायत दाखिल कर सकते हैं।
लोकपाल और नियामक आयोग बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा के लिए ऐसे मामलों में कड़ा संज्ञान लेते हैं।
ग. उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार और पदीय दुरुपयोग की शिकायत
इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए प्रबंध निदेशक (MD, UPCL, देहरादून), मुख्य अभियंता (वितरण, हरिद्वार जोन), तथा जिलाधिकारी (District Magistrate, Haridwar) को साक्ष्यों के साथ संपूर्ण प्रकरण की शिकायत भेजें।
लाइनमैन और स्थानीय कर्मचारियों द्वारा कथित रूप से आर्थिक लेनदेन और दबाव बनाए जाने के मामलों को भी इसमें प्रमुखता से उठाया जाना चाहिए।
उच्च अधिकारियों को भेजने के लिए लिखित शिकायत पत्र (Draft Format)
अधिशासी अभियंता (EDD),
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPCL), रुड़की / हरिद्वार (उत्तराखंड)
पुरानी सीएम हेल्पलाइन शिकायत की रंजिश व व्यक्तिगत दुर्भावना से प्रेरित होकर कनेक्शन संख्या RD217________ पर बिना किसी छापेमारी/पंचनामे के जारी किए गए फर्जी बिजली चोरी के नोटिस को निरस्त करने तथा दोषी स्थानीय कर्मियों (SDO, JE व लाइनमैन) के खिलाफ पदीय दुरुपयोग व भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच कराकर कठोर कार्रवाई के संबंध में।
M S A पुत्र S अहमद, निवासी मोहल्ला ________, मंगलौर, तहसील रुड़की, जिला हरिद्वार का एक नियमित बिजली उपभोक्ता हूँ (कनेक्शन संख्या: RD217________)।
यह है कि प्रार्थी द्वारा पूर्व में क्षेत्र में विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली और अनियमितताओं के खिलाफ सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई गई थी। इसी शिकायत की खुन्नस और रंजिश रखते हुए स्थानीय स्तर पर तैनात अवर अभियंता (JE), SDO तथा लाइनमैन (चिंकू आदि) द्वारा लगातार मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।
यह है कि स्थानीय कर्मचारियों द्वारा विभाग के नाम पर अनुचित दबाव बनाकर धनराशि वसूलने के प्रयास किए गए, किंतु जब प्रार्थी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई, तो दुर्भावना से ग्रस्त होकर मेरे परिसर पर बिना किसी पूर्व सूचना, बिना किसी वैध छापेमारी (Inspection), बिना किसी वीडियोग्राफी/फोटोग्राफी और बिना किसी पंचनामे (Inspection Report) के एक मनगढ़ंत और फर्जी बिजली चोरी का नोटिस थमा दिया गया है।
नियमानुसार किसी भी विद्युत चोरी के प्रकरण में मौके पर पंचनामा तैयार किया जाना, वीडियोग्राफी होना और उपभोक्ता/गवाह के हस्ताक्षर होना अनिवार्य है, जो कि इस मामले में पूरी तरह नदारद है क्योंकि मौके पर कोई कार्रवाई हुई ही नहीं है।
M S A का आपसे विनम्र अनुरोध है कि
इस पूरी तरह फर्जी, अवैध और दुर्भावनापूर्ण नोटिस को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए।
इस प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए कि बिना किसी निरीक्षण के किस आधार पर यह नोटिस जारी किया गया।
पदीय पद का दुरुपयोग कर व्यक्तिगत रंजिश निकालने वाले दोषी SDO, JE और संबंधित लाइनमैन के खिलाफ कठोर विभागीय एवं विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाए।
यदि इस मामले में न्यायसंगत त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती है,