जिले में अपराध पर अंकुश लगाने के साथ ही युवाओं को नशे की गिरफ्त से दूर रखकर स्वस्थ, सुरक्षित और सक्षम समाज के निर्माण के उद्देश्य से पालकमंत्री चंद्रकांत पाटील की संकल्पना के तहत पिछले डेढ़ वर्ष से ‘नशामुक्त सांगली जिला अभियान’ चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत जिला प्रशासन और जिला पुलिस बल के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सुबह 8.30 बजे ‘नशामुक्त सांगली, सुरक्षित सांगली’ के लिए नशामुक्ति निर्धार पदयात्रा निकाली जाएगी। इस पदयात्रा में बड़ी संख्या में सांगली के नागरिक शामिल हों, ऐसा संयुक्त आह्वान जिलाधिकारी डॉ. मैनाक घोष और पुलिस अधीक्षक तुषार दोशी ने किया है। नशामुक्त सांगली जिला अभियान के तहत पिछले एक वर्ष से ‘कानून के भय से रोकथाम, जनजागृति और पुनर्वास’ की त्रिसूत्री के आधार पर विभिन्न विभागों के सामूहिक प्रयास से कई उपक्रम चलाए गए। इसी अभियान के एक हिस्से के रूप में सोमवार, 24 अगस्त 2026 को सुबह 8.30 बजे नशामुक्ति निर्धार पदयात्रा का आयोजन किया गया है। इस पदयात्रा में स्वयं पालकमंत्री चंद्रकांत पाटील उपस्थित रहकर नशामुक्ति आंदोलन को मजबूती देंगे। कल्पद्रुम मैदान, नेमिनाथनगर, विश्रामबाग, सांगली से यह पदयात्रा शुरू होगी और इसका समापन पुलिस मुख्यालय, सांगली में किया जाएगा। समाज के सभी वर्गों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाना, युवाओं में नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूकता पैदा करना और सुरक्षित समाज के निर्माण के लिए सामूहिक संकल्प लेना, इस पदयात्रा का मुख्य उद्देश्य है।
स्कूली जीवन से ही नशामुक्ति के संस्कार
स्कूली जीवन से ही विद्यार्थियों में नशामुक्ति के संस्कार विकसित करने के लिए पालकमंत्री चंद्रकांत पाटील की पहल पर पिछले वर्ष नवंबर-दिसंबर में जिले के स्कूलों में ‘संयम उपक्रम’ चलाया गया। इसके तहत करीब 292 स्कूलों के 544 मास्टर ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया गया और उनके माध्यम से लगभग 11 हजार किशोर विद्यार्थियों को नशामुक्ति की शिक्षा दी गई। किशोर विद्यार्थियों में आत्म-नियंत्रण और आत्म-संयम के कौशल विकसित कर उन्हें नशे से दूर रहने के लिए सक्षम बनाना इस उपक्रम का मुख्य उद्देश्य था। इसके लिए ज्ञानप्रबोधिनी संस्था, पुणे को दिए जाने वाले 15 लाख रुपये के मानदेय की व्यवस्था भी पालकमंत्री की पहल से की गई। इसके अलावा विभिन्न प्रतियोगिताओं के माध्यम से विद्यार्थियों और युवाओं को नशे से दूर रखने तथा नशे के दुष्परिणामों के बारे में जनजागृति की गई। इस अभियान के माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के जरिए नशे के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आर्थिक दुष्परिणामों की जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई।
उपचार और पुनर्वास की सुविधा
नशे के आदी लोगों को केवल परामर्श देने के बजाय आवश्यक चिकित्सा उपचार और पुनर्वास की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए भी पालकमंत्री के निर्देशानुसार सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल, मिरज में नि:शुल्क परामर्श और मामूली शुल्क में उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे नशे के आदी लोगों को आवश्यक उपचार मिलने के साथ ही उन्हें दोबारा समाज की मुख्यधारा में लाने के पुनर्वास प्रयासों को भी मजबूती मिल रही है।
नशामुक्त समाज से अपराध पर भी नियंत्रण
नशे की लत का असर केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका प्रभाव परिवार, सामाजिक वातावरण और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ता है। नशे के आदी युवाओं के विभिन्न प्रकार के अपराधों की ओर बढ़ने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए नशामुक्त समाज का निर्माण अपराध पर अंकुश लगाने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इसी पृष्ठभूमि में रोकथाम के उपायों के साथ ही जनजागृति, उपचार और पुनर्वास के स्तर पर समन्वय के साथ कार्य किया जा रहा है।
सामूहिक सहभागिता से बनाएं नशामुक्त सांगली
नशामुक्त सांगली और सुरक्षित सांगली केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। माता-पिता, शिक्षक, विद्यार्थी, युवा, सामाजिक संस्थाएं, स्वयंसेवी संस्थाएं और नागरिक इस अभियान में सक्रिय रूप से शामिल हों, तो नशामुक्त समाज निर्माण के प्रयासों को और व्यापक स्वरूप मिल सकता है। युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने और सांगली जिले को नशामुक्त बनाने के लिए 24 अगस्त की नशामुक्ति निर्धार पदयात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होने का आह्वान किया गया है।