महिलाओं की समस्याओं, अपेक्षाओं, कठिनाइयों तथा उनके आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए आवश्यक उपायों को समझने के उद्देश्य से सांगली–मिरज–कुपवाड़ शहर महानगरपालिका की ओर से ‘हितगुज – सत्र क्रमांक 1’ विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन मिरज के बालगंधर्व नाट्य मंदिर में किया गया।
महिलाओं को केवल मार्गदर्शन देने के बजाय उनके मन में चल रहे सवालों को सीधे जानना, उनके अनुभवों को मंच उपलब्ध कराना तथा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना इस पहल का प्रमुख उद्देश्य था।
कार्यक्रम में महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती संजीता महापात्रा के हाथों विभिन्न महिला बचत समूहों को कुल ₹43 लाख 50 हजार की ऋण राशि वितरित की गई। IDBI बैंक के शाखा अधिकारी परशुराम की उपस्थिति में ऋण वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
‘हितगुज’ के माध्यम से महिलाओं से खुलकर संवाद
“हमारी राय, हमारी भागीदारी, हमारा बदलाव” इस विचार के आधार पर आयोजित ‘हितगुज’ कार्यक्रम में महिलाओं ने अपनी समस्याओं, अनुभवों, अपेक्षाओं और भविष्य के अवसरों को लेकर खुलकर संवाद किया।
महिलाओं को सरकार की विभिन्न योजनाओं, बचत समूहों के माध्यम से उपलब्ध आर्थिक अवसरों, कौशल प्रशिक्षण, रोजगार सृजन तथा स्वरोजगार के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी गई।
महिलाएं केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली लाभार्थी न रहें, बल्कि स्वयं रोजगार पैदा करने वाली, आर्थिक रूप से सक्षम और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने वाली महिला उद्यमी बनें, इस पर कार्यक्रम में विशेष जोर दिया गया।
बचत समूह की महिलाओं को ₹43.50 लाख का ऋण वितरण
महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के रूप में कार्यक्रम में विभिन्न महिला बचत समूहों को कुल ₹43.50 लाख का ऋण वितरित किया गया।
ऋण प्राप्त करने वाले बचत समूहों में गगनगिरी महिला बचत समूह, गंगामाई महिला बचत समूह, आरंभ महिला बचत समूह, तेजस्विनी महिला बचत समूह, महालक्ष्मी महिला बचत समूह, रमाई महिला बचत समूह और कोहिनूर महिला बचत समूह शामिल हैं।
महिलाओं से अपील की गई कि वे बचत समूह के माध्यम से एकजुट होकर उपलब्ध आर्थिक संसाधनों का उचित उपयोग करें तथा आय सृजन, व्यवसाय विस्तार और परिवार की आर्थिक स्थिरता के लिए प्रयास करें।
“महिला सक्षम हुई तो पूरा परिवार सक्षम होता है”
कार्यक्रम में महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए महिलाओं को काम उपलब्ध कराना, उन्हें उचित दिशा दिखाना और उनके कौशल को बाजार उपलब्ध कराना, इन तीन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया गया।
महिला आर्थिक रूप से सक्षम होती है तो उसके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इससे बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, जीवन स्तर और परिवार में निर्णय लेने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
इसलिए महिला सशक्तीकरण को केवल महिलाओं का विषय न मानते हुए इसे पूरे परिवार और समाज के विकास का केंद्रबिंदु मानने की आवश्यकता व्यक्त की गई।
इस अवसर पर महिलाओं को प्रेरित करते हुए मेलघाट की महिलाओं के सामूहिक प्रयासों का उदाहरण दिया गया। परिस्थितियां कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हों, यदि महिलाएं एकजुट होकर निष्ठा और निरंतरता के साथ प्रयास करें तो आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन लाया जा सकता है, ऐसा संदेश दिया गया।
“एक महिला नहीं, बल्कि हर महिला को बचत समूह से जोड़ना आवश्यक”
महिला सशक्तीकरण का दायरा बढ़ाने के लिए क्षेत्र की अधिक से अधिक महिलाओं को बचत समूहों के माध्यम से जोड़ने की आवश्यकता व्यक्त की गई।
“अपने आसपास की महिलाओं को भी बचत समूह में शामिल करें”, ऐसी अपील की गई।
बचत, आपसी सहयोग, कौशल विकास और सामूहिक व्यवसाय के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कौशल प्रशिक्षण से लेकर बाजार तक विभिन्न पहल
महिलाओं को केवल प्रशिक्षण देकर रुकने के बजाय उनके कौशल को काम, बाजार और आय से जोड़ना आवश्यक है, यह बात भी स्पष्ट की गई।
महानगरपालिका की ओर से महिलाओं के लिए विभिन्न स्किल ट्रेनिंग कार्यक्रम, बचत समूहों को मार्गदर्शन, महिला उत्पादों की प्रदर्शनियां, व्यवसाय के लिए आवश्यक मार्गदर्शन, आर्थिक सहायता से जोड़ना तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
आगे भी महिलाओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मासिक नियोजन के आधार पर निरंतर विभिन्न गतिविधियां आयोजित करने पर जोर दिया जाएगा।
महिलाओं को काम और उचित दिशा देना प्रमुख उद्देश्य
कार्यक्रम में चर्चा के दौरान “महिलाओं को काम उपलब्ध कराना आवश्यक है” यह मुद्दा प्रमुखता से सामने आया।
महिलाओं के पारंपरिक कौशल, अनुभव और क्षमता को आधुनिक प्रशिक्षण से जोड़कर रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर पैदा करने के लिए महानगरपालिका प्रयासरत रहेगी।
महिलाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए आवश्यक दिशा, प्रशिक्षण, आर्थिक सहायता और बाजार से जोड़ने की सुविधा उपलब्ध कराना महिला सशक्तीकरण का प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है।
महिला एवं बाल कल्याण विभाग की पहल
‘हितगुज’ पहल के माध्यम से महिलाओं से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं पर उपाय करने के लिए महानगरपालिका प्रशासन ने पहल की है।
आने वाले समय में भी महिलाओं की जरूरतों और सुझावों के अनुसार ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित कर “महिलाओं की बात सुनना – समस्या समझना – समाधान करना – उसके परिणाम की समीक्षा करना” इस पद्धति से काम करने का मानस व्यक्त किया गया।
कार्यक्रम में गणमान्य लोगों की उपस्थिति
कार्यक्रम में महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती संजीता महापात्रा, महिला एवं बाल कल्याण समिति की सभापति श्रीमती बानू जमादार, उपायुक्त श्रीमती स्मृति पाटील, श्रीमती विद्या पाटील, श्रीमती अश्विनी पाटील, सहायक आयुक्त साई दडस, श्रीमती महादेवी कुरणे, चिकित्सा स्वास्थ्य अधिकारी श्रीमती सुचेता पवार, लेखा परीक्षा अधिकारी श्रीमती विद्यागौरी खांडेकर, संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी, IDBI बैंक के शाखा अधिकारी परशुराम तथा बड़ी संख्या में महिला बचत समूहों की प्रतिनिधियों की उपस्थिति रही।
नियोजन और आयोजन में अधिकारी-कर्मचारियों का योगदान
कार्यक्रम का नियोजन एवं आयोजन आजीविका योजना के माध्यम से किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए ज्योति सर्वदे, मतीन अमीन, किरण पाटील, वंदना सवाखंडे, संपदा मोरे, शाइन शेख और सदाशिव हंकारे ने नियोजन एवं समन्वय की जिम्मेदारी निभाई।
आगे की दिशा : “महिला सशक्तीकरण से परिवार सशक्तीकरण”
‘हितगुज’ केवल एक दिवसीय कार्यक्रम न रहकर महिलाओं की समस्याओं पर निरंतर संवाद करने और उस संवाद के माध्यम से प्रत्यक्ष कार्रवाई करने वाला मंच बने, इसके लिए महानगरपालिका प्रशासन प्रयासरत रहेगा।
महिलाओं को काम, कौशल को अवसर, बचत समूहों को आर्थिक मजबूती और उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराकर महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर आगामी समय में विशेष जोर दिया जाएगा।
“महिला सक्षम हुई तो परिवार सक्षम होता है; परिवार सक्षम हुआ तो समाज सक्षम होता है और सक्षम समाज से सक्षम शहर का निर्माण होता है।”
यही ‘हितगुज’ पहल के पीछे की व्यापक भूमिका है, ऐसा महानगरपालिका प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया।