स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सांगली जिले के आरेवाड़ी का प्रसिद्ध गजनृत्य दिल्ली में प्रस्तुत किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने इस नृत्य की जमकर सराहना की, वहीं दिल्लीवासियों ने भी इस प्रस्तुति से अपने दिल जीत लिए।
राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक सभागृह में आयोजित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम में सांगली जिले के इस गजनृत्य को विशेष आमंत्रण मिला था। इस कार्यक्रम में देशभर की विभिन्न लोककलाओं ने सहभाग लिया। महाराष्ट्र की ओर से कोल्हापुर के लेझीम दल, मुंबई के कोलीगीत और लावणी, कुडाळ का दशावतार, नागपुर का ढोल-ताशा तथा नाशिक के सोंगी मुखौटों का भी शानदार प्रदर्शन किया गया।
राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक सभागृह में आयोजित ‘एट होम’ विशेष कार्यक्रम में बिरुदेवनगरी, आरेवाड़ी के गजनृत्य ने अपने लयबद्ध ढोल वादन और शानदार प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी इस पारंपरिक लोककला की भरपूर प्रशंसा की।
17 अगस्त को महाराष्ट्र सदन, नई दिल्ली और दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में ‘चतुरंग’ नामक सांस्कृतिक एवं संगीतमय कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। जत के विधायक गोपीचंद पडळकर ने भी इस कार्यक्रम में उपस्थित होकर गजनृत्य की प्रस्तुति का आनंद लिया। इस अवसर पर महाराष्ट्र सदन की आयुक्त एवं सचिव श्वेता सिंघल ने नागपुर केंद्र की निदेशक आस्था कार्लेकर का सत्कार किया।
करीब 40 मिनट के इस कार्यक्रम में 16 विभिन्न कलाओं की प्रस्तुतियां दी गईं। महाराष्ट्र के ढोल-ताशे और तुतारी की गूंज ने दिल्ली में अपनी अलग छाप छोड़ी।