स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं के लिए वरदान साबित हो रहा है। यह पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली है और इसमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। स्मार्ट मीटर के माध्यम से बिजली की वास्तविक खपत और तैयार होने वाले बिल में अधिक पारदर्शिता आई है। यह जानकारी कोल्हापुर परिमंडल के मुख्य अभियंता स्वप्निल काटकर तथा सांगली के अधीक्षक अभियंता अमित बोकिल ने दी। इस अवसर पर कार्यकारी अभियंता आशीष मेहता उपस्थित थे।
मुख्य अभियंता काटकर ने बताया कि स्मार्ट मीटर को लेकर नागरिकों के मन में कई तरह की शंकाएं हैं। उपभोक्ताओं को सलाह दी गई है कि मीटर लगवाने से पहले अपने नजदीकी बिजली केंद्र पर इसका डेमो देखकर इसकी कार्यप्रणाली समझें। उन्होंने स्पष्ट किया कि मीटर से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वर पर इसकी जानकारी दर्ज हो जाती है और नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
सांगली जिले में अब तक 64 प्रतिशत मीटर कनेक्शन पूरे हो चुके हैं। उपभोक्ताओं की ओर से भी स्मार्ट मीटर को अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है। विशेष बात यह है कि स्मार्ट मीटर कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। फिलहाल ये मीटर पोस्टपेड व्यवस्था में उपलब्ध हैं।
अधीक्षक अभियंता अमित बोकिल ने बताया कि कवठेमहांकाळ तालुका में 1 लाख 4 हजार 104 ग्राहकों में से 85 हजार 974 के मीटर लगाए जा चुके हैं। यानी 82.58 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। सांगली ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के 3 लाख 19 हजार 627 ग्राहकों में से 2 लाख 16 हजार 297 ग्राहकों के मीटर लगाए जा चुके हैं। वहीं ईश्वरपुर में 1 लाख 65 हजार 117 ग्राहकों में से 1 लाख 1 हजार 855 के मीटर लगाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि विटा में स्मार्ट मीटर लगाने का प्रतिशत सबसे कम है, हालांकि वहां भी करीब 50 प्रतिशत मीटर लगाए जा चुके हैं। शेष ग्राहकों तक पहुंचने का कार्य जारी है।
स्मार्ट मीटर की गुणवत्ता और सटीकता को लेकर भी उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए बोकिल ने बताया कि विश्रामबाग में करोड़ों रुपये की लागत से अत्याधुनिक मीटर जांच प्रयोगशाला स्थापित की गई है। यहां जर्मन कंपनी की आधुनिक मशीनरी के माध्यम से स्मार्ट मीटरों की जांच की जाती है। इससे उपभोक्ताओं की शंकाओं का तकनीकी स्तर पर समाधान किया जा सकता है।