राज्य में ताड़ी पीने वालों की संख्या काफी अधिक है। फिलहाल मिलावटी ताड़ी के मामले को लेकर राज्य आबकारी विभाग के आयुक्त डॉ. राजेश देशमुख एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने राज्य के सभी जिलाधिकारियों और अधीक्षकों को ताड़ी के पेड़ों का सर्वेक्षण करने के आदेश दिए हैं।
ताड़ी एक विशेष प्रकार के पेड़ से प्राप्त की जाती है। जिस पेड़ से ताड़ी बनाई जाती है, उससे सबसे पहले एक विशेष प्रकार का रस निकाला जाता है। इस रस पर प्रक्रिया करने के बाद इसे ताड़ी की दुकानों के माध्यम से बेचा जाता है। हालांकि, हाल के दिनों में ताड़ी में मिलावट की शिकायतें बढ़ने के मद्देनजर आयुक्त ने राज्य में ताड़ी का उत्पादन करने वाले पेड़ों की संख्या की गणना करने के आदेश दिए हैं।
राज्य आबकारी विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, वर्तमान में ताड़ी की दुकानों की अवधि 31 अगस्त तक है। अब राज्य में मौजूद सभी ताड़ी के पेड़ों की संख्या की गणना की जाएगी और उसी के आधार पर दुकानों के लिए नीलामी की जाएगी। इसके लिए अब राजस्व विभाग की ओर से पेड़ों की गिनती किए जाने की संभावना है।
जिस जिले में ताड़ी की मिलावटी बिक्री का मामला सामने आएगा, वहां संबंधित अधिकारी और भरारी पथक के क्षेत्रीय अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके अनुसार उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इससे अब ताड़ी की बिक्री के मामले में राज्य आबकारी विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी और बढ़ गई है।