नगर निगम क्षेत्र मिरज मे केंद्र सरकार के अनुदान से बनने जा रहे ई-बस चार्जिंग स्टेशन और डिपो परियोजना को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। हैरानी की बात यह है कि इस परियोजना का विरोध स्वयं क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जाने से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। हालांकि यह मामला फिलहाल न्यायालय में लंबित है, लेकिन अब इस महत्वाकांक्षी परियोजना के राजनीतिक विवादों में घिरने की आशंका भी बढ़ गई है।
मिरज–पंढरपुर मार्ग पर महानगरपालिका की लगभग चार एकड़ भूमि पर केंद्र सरकार की पीएम ई-बस सेवा योजना के अंतर्गत ई-बस चार्जिंग स्टेशन और डिपो बनाया जा रहा है। इस परियोजना के माध्यम से महानगरपालिका क्षेत्र के साथ-साथ आसपास के 20 किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के लिए 50 इलेक्ट्रिक बसें शुरू करने को मंजूरी मिली थी।
हालांकि, मंजूरी मिलने के तीन वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद चार्जिंग स्टेशन और डिपो का निर्माण आज भी अधूरा पड़ा है। भूमि के उपयोग को लेकर विवाद उत्पन्न होने के कारण मामला न्यायालय में पहुंच गया और अदालत के आदेश के अनुसार फिलहाल निर्माण कार्य पर रोक लगी हुई है। महानगरपालिका प्रशासन इस कानूनी विवाद का समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है।
इसी बीच महानगरपालिका के सभागृह में आयोजित बैठक के दौरान विधायक डॉ. सुरेश खाडे ने आयुक्त को खुले तौर पर चुनौती देते हुए कहा कि "यह परियोजना कैसे लागू होती है, मैं देखता हूं।" उनके इस बयान के बाद पूरे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है।
बैठक में विधायक डॉ. खाडे ने कहा कि उन्हें शुरुआत से ही इस स्थान पर परियोजना बनाने का विरोध था। उनके अनुसार जिस स्थान पर चार्जिंग स्टेशन बनाया जा रहा है, वहां की सड़कें काफी संकरी हैं और भविष्य में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू होने पर गंभीर यातायात जाम की स्थिति पैदा होगी। उन्होंने बताया कि पहले इस परियोजना के लिए बेडग रोड स्थित बस डिपो की जमीन का भी निरीक्षण किया गया था, लेकिन बाद में महानगरपालिका ने वर्तमान स्थान पर ही काम शुरू कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अदालत की रोक हटने के बाद भी वे मौजूदा स्थान पर परियोजना का विरोध जारी रखेंगे।
दूसरी ओर, महानगरपालिका आयुक्त संजिता महापात्र ने परियोजना का पक्ष रखते हुए कहा कि यह केंद्र सरकार के करोड़ों रुपये के अनुदान से तैयार हो रही महत्वपूर्ण सार्वजनिक परियोजना है। उन्होंने बताया कि महानगरपालिका की भूमि पर इस परियोजना का काफी निर्माण कार्य पहले ही पूरा हो चुका है और वर्तमान स्थिति में इसकी जगह बदलना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में संभावित यातायात समस्या का समाधान उचित ट्रैफिक प्लानिंग के माध्यम से किया जा सकता है।
अब यह परियोजना केवल कानूनी विवाद तक सीमित नहीं रही, बल्कि राजनीतिक विरोध के कारण भी चर्चा का विषय बन गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि जनप्रतिनिधि ही विकास परियोजनाओं का विरोध करेंगे, तो मिरज शहर में भविष्य में नई सार्वजनिक परियोजनाओं का रास्ता कैसे खुलेगा? वहीं, महानगरपालिका प्रशासन के सामने अब कानूनी लड़ाई के साथ-साथ राजनीतिक गतिरोध दूर करने की भी नई चुनौती खड़ी हो गई है।