महाराष्ट्र सरकार के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, सांगली-मिरज-कुपवाड शहर महानगरपालिका की ओर से इस वर्ष श्रीगणेशोत्सव को पर्यावरणपूरक, प्लास्टिक मुक्त एवं प्रदूषणमुक्त तरीके से मनाने के लिए व्यापक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसी के तहत महानगरपालिका आयुक्त श्रीमती संजिता महापात्र (भा.प्र.से.) की अध्यक्षता में हाल ही में एक महत्वपूर्ण समीक्षा एवं नियोजन बैठक आयोजित की गई।
इस वर्ष 14 सितंबर से शुरू होने वाले गणेशोत्सव की पृष्ठभूमि में प्रशासन द्वारा लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय निम्नानुसार हैं।
पर्यावरण की रक्षा के लिए महानगरपालिका ने कड़े कदम उठाए हैं। आगामी वर्ष से सांगली, मिरज एवं कुपवाड शहर महानगरपालिका क्षेत्र में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की मूर्तियों, रासायनिक रंगों तथा सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, ऐसी सख्त चेतावनी प्रशासन की ओर से दी गई है।
गणेशोत्सव के सफल क्रियान्वयन के लिए महानगरपालिका आयुक्त की अध्यक्षता में विभाग प्रमुखों एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं (NGOs) की एक विशेष नियोजन समिति गठित की गई है। बाजार में उपलब्ध विषैले रंगों से रंगी शाडू एवं POP की मूर्तियों के बजाय नागरिक गोमय अथवा खेत की मिट्टी एवं गाद की मिट्टी से बनी पर्यावरणपूरक मूर्तियों की स्थापना करें, ऐसा आवाहन किया गया है। साथ ही, स्कूल एवं महाविद्यालयों में विद्यार्थियों के लिए मिट्टी की मूर्तियां बनाने की कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी।
गणेशोत्सव में सजावट के लिए थर्माकोल और प्लास्टिक शीट जैसे अविघटनशील पदार्थों का उपयोग पर्यावरण पर दीर्घकालीन दुष्प्रभाव डालता है। इसलिए सजावट में थर्माकोल एवं प्लास्टिक का पूरी तरह से परहेज करते हुए इसके स्थान पर कागज, गत्ता एवं कपड़े जैसे प्राकृतिक तथा पुन: उपयोग योग्य सामग्री का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं। कृत्रिम फूलों की सजावट के बजाय प्राकृतिक फूलों का उपयोग करने की अपील की गई है। साथ ही, शैक्षणिक संस्थानों में भी विद्यार्थियों के बीच इस संबंध में व्यापक जनजागृति अभियान चलाया जा रहा है।
प्राकृतिक जलस्रोतों (नदियों, कुओं एवं तालाबों) के प्रदूषण को रोकने के लिए महानगरपालिका द्वारा शहर में विशेष नियोजन किया गया है।
महानगरपालिका के चारों प्रभाग समिति कार्यालय क्षेत्रों में मैदानों, उद्यानों, खुली जगहों तथा बड़ी हाउसिंग सोसायटियों के परिसरों में बड़ी संख्या में कृत्रिम तालाब एवं खेत तालाबों की व्यवस्था की जा रही है। छह फीट से कम ऊंचाई वाली सभी घरेलू एवं सार्वजनिक श्रीगणेश मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में ही करना अनिवार्य किया गया है। साथ ही, नदी किनारे मानव श्रृंखला बनाकर निर्माल्य को प्राकृतिक जलस्रोतों में न डालते हुए निर्माल्य संग्रह के लिए तैयार किए गए मंगल कलश में ही जमा करने की अपील की गई है।
पर्यावरणपूरक गणेशोत्सव मनाने वाले घरेलू एवं सार्वजनिक गणेश मंडलों तथा उत्कृष्ट झांकियां प्रस्तुत करने वाले शैक्षणिक संस्थानों को प्रोत्साहित करने के लिए महानगरपालिका एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आकर्षक प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया है। गणेश विसर्जन के दौरान ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए लेजर लाइट का उपयोग न करने की अपील भी की जा रही है।
इस महत्वपूर्ण बैठक में आयुक्त श्रीमती संजिता महापात्र, उपायुक्त श्रीमती स्मृति पाटील, उपायुक्त श्रीमती विद्या पाटील, उपायुक्त पराग कोडगुले, पर्यावरण अभियंता अजित गुजराथी, मुख्य स्वच्छता अधिकारी याकुब मद्रासी, प्रशासन अधिकारी (शिक्षण विभाग) प्रकाश खेडकर, सहायक आयुक्त तथा जनसंपर्क अधिकारी विनायक शिंदे सहित विभिन्न सामाजिक सेवा संस्थाओं (NGOs) के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
पर्यावरण का संरक्षण एवं संवर्धन करना प्रत्येक व्यक्ति की सामूहिक जिम्मेदारी है। इसलिए इस वर्ष गणेशोत्सव अत्यंत आनंददायी, पर्यावरणपूरक एवं अनुशासित तरीके से मनाते हुए प्रशासन को पूर्ण सहयोग प्रदान करें, ऐसा आवाहन महानगरपालिका प्रशासन की ओर से किया गया है।