सांगली गणपति पंचायतन संस्थान में ‘चोर गणपति’ की प्रतिष्ठापना के साथ संस्थान के भव्य-दिव्य गणेशोत्सव की शुरुआत हुई। सांगली के साथ ही मिरज के सांगलीकर मळा परिसर स्थित संस्थान के श्री गणेश मंदिर में भी ‘चोर गणपति’ का आगमन हुआ।
संस्थान के अधिपति हिज हायनेस राजा विजयसिंह पटवर्धन ने हमारे प्रतिनिधि से बातचीत में बताया कि सोमवार से संस्थान के श्री गणेश मंदिर में विभिन्न धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान के व्यवस्थापक जयदीप अभ्यंकर उपस्थित थे।
राजा विजयसिंह पटवर्धन ने बताया कि पहले चिंतामणराव पटवर्धन ने ‘चोर गणपति’ उत्सव की शुरुआत की थी। भाद्रपद शुद्ध प्रतिपदा की पहली सुबह यह गणपति बिना किसी गाजे-बाजे और बिना किसी धूमधाम के, मानो चोरी-छिपे मंदिर में विराजमान होते हैं। इसी कारण इन्हें ‘चोर गणपति’ कहा जाता है।
उन्होंने कहा कि इस परंपरा के पीछे कोई विशेष पौराणिक आख्यायिका नहीं है। केवल गणेशोत्सव के आगमन की सूचना सांगलीवासियों को ‘चोर गणपति’ के आगमन से मिलती है। विशेष बात यह है कि श्री गणेश की यह प्रतिमा पूरी तरह पर्यावरण अनुकूल कागज की लुगदी से बनाई जाती है। इस प्रतिमा की परंपरा करीब पौने दो सौ वर्षों से चली आ रही है।
‘चोर गणपति’ का विधिवत पूजन ऋषि पंचमी के दिन पांचवें दिन भक्तिभाव से किया जाता है। इसके बाद प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जाता, बल्कि उसे सुरक्षित स्थान पर संरक्षित रखा जाता है।
संस्थान के मुख्य व्यवस्थापक जयदीप अभ्यंकर ने बताया कि संस्थान के गणेशोत्सव की शुरुआत सोमवार से होगी। राजवाड़ा चौक स्थित संस्थान के दरबार हॉल में श्री गणेश की प्रतिष्ठापना की जाएगी। संस्थान के अधिपति विजयसिंह राजे एवं राजलक्ष्मी राजे पटवर्धन के हाथों श्री गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना की जाएगी।
विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
मंगलवार शाम को ‘स्वरनक्षत्र’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें पुराने और नए मराठी एवं हिंदी गीत प्रस्तुत किए जाएंगे।
बुधवार को सुधीर फडके द्वारा स्वरबद्ध किए गए गीतों पर आधारित ‘फिरुनी मी जन्मेन मी’ कार्यक्रम का आयोजन होगा।
गुरुवार को पारंपरिक हल्दी-कुंकू समारोह के साथ अभंग, भावगीत एवं भक्तिगायन का कार्यक्रम होगा।
वहीं शुक्रवार शाम को पारंपरिक वाद्यों की गूंज के बीच श्री गणेश की भव्य शोभायात्रा के साथ गणेशोत्सव का समापन होगा। इस शोभायात्रा में अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
जयदीप अभ्यंकर ने स्पष्ट किया कि इस रथोत्सव एवं शोभायात्रा के मद्देनजर शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर पुलिस प्रशासन के साथ चर्चा की जा रही है। इसके बाद यातायात का स्वतंत्र नियोजन किया जाएगा।