


जावेद अंसारी बनाम ऊर्जा निगम (मंगलौर) प्रकरण
यह मामला एक तरफ विद्युत विभाग (एसडीओ अभिनव सैनी) की चेकिंग कार्रवाई और दूसरी तरफ उपभोक्ता जावेद अंसारी द्वारा लगाए गए गंभीर भ्रष्टाचार व धमकी के आरोपों के बीच का एक बेहद गंभीर विवाद है। आरोपी पक्ष / पीड़ित (जावेद अंसारी) के आरोप घटना का समय 29 सितंबर, सुबह लगभग 11 से 12 बजे के बीच। कार्रवाई ऊर्जा निगम की टीम ने घर पहुंचकर बिजली का मीटर और केबल उतार लिया।
डराने-धमकाने के आरोप मीटर में गड़बड़ी का डर दिखाकर और जेल भेजने की धमकी दी गई। रिश्वत की मांग मामले को रफा-दफा करने के एवज में 1.50 लाख रुपये की मांग की गई, जो कथित तौर पर सागर सैनी को दिए गए। सबूत पीड़ित का दावा है कि उसके पास मीटर उतारने की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद है।शिकायत इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई गई है। बिजली विभाग का पक्ष (अभिनव सैनी, एसडीओ, उपखंड मंगलौर) मीटर जब्ती से इनकार विभाग का कहना है कि शिकायतकर्ता का विद्युत मीटर जब्त नहीं किया गया है। हंगामा और छूटा हुआ सामान विभाग के अनुसार, चेकिंग के दौरान मौके पर हंगामा हो जाने के कारण मीटर और केबल मौके पर ही छूट गया था। हंगामा होने के कारण सामान मौके पर छूट गया था (यानी टीम अपनी जान बचाकर भागी)। पीड़ित का पक्ष व वीडियो जावेद अंसारी बनाम ऊर्जा निगम (मंगलौर) प्रकरण — अपडेटेड विवरण एवं गंभीर आरोप इस प्रकरण में पीड़ित जावेद अंसारी पक्ष द्वारा महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और नियमों के उल्लंघन से जुड़े कुछ और बेहद गंभीर आरोप जोड़े गए हैं। आइए इस पूरे मामले के अपडेटेड और विस्तारित विवरण को बिंदुवार समझें पीड़ित पक्ष (जावेद अंसारी) के नए और मुख्य आरोप घटना का समय और तारीख 29 सितंबर, सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच। मीटर और केबल जब्ती ऊर्जा निगम की टीम द्वारा घर पहुंचकर मीटर और केबल उतारने का आरोप। भय और धमकी मीटर में गड़बड़ी का डर दिखाकर और जेल भेजने की धमकी देना। रिश्वतखोरी मामले को रफा-दफा करने के एवज में 1.50 लाख रुपये की मांग करना और यह रकम कथित तौर पर सागर सैनी को दिया जाना। महिलाओं के साथ बदतमीजी (नया गंभीर आरोप) पीड़ित पक्ष का कहना है कि विजिलेंस/ऊर्जा निगम की टीम के साथ कोई महिला पुलिसकर्मी या महिला अधिकारी मौजूद नहीं थी।
इसके बावजूद टीम के सदस्यों द्वारा जावेद के परिवार की महिलाओं के साथ अभद्रता और बदतमीजी की गई।
वीडियो सबूत व शिकायत मीटर उतारने की वीडियो एरिकॉर्डिंग होने का दावा, तथा इस संबंध में मुख्यमंत्री पोर्टल पर आधिकारिक शिकायत दर्ज कराना। बिजली विभाग का पक्ष और उस पर पीड़ित का पलटवार वीडियो में साफ नजर आ रहा है कि टीम मीटर और केबल साथ लेकर जा रही है, जो विभाग के दावे को झूठा साबित करता है। विजिलेंस और सौदेबाजी पीड़ित पक्ष का आरोप है कि विजिलेंस टीम के नाम पर पहले छापेमारी का भय दिखाया जाता है और फिर सौदेबाजी की जाती है। एसडीओ की उपस्थिति और भीड़ पीड़ित का आरोप है कि घटना के वक्त एसडीओ खुद वहां मौजूद थे और वीडियो में भीड़ नहीं दिख रही है, जबकि विभाग "भीड़ के हंगामे" का हवाला दे रहा है यह मामला पूरी तरह से निष्पक्ष जांच का विषय है। चूंकि पीड़ित के पास वीडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा है और मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत भी दर्ज है, इसलिए उच्चाधिकारियों द्वारा वीडियो फुटेज, कॉल रिकॉर्डिंग और वित्तीय लेन-देन (यदि कोई डिजिटल सबूत हो) की गहन जांच के बाद ही सच्चाई सामने आ सकेगी।मामले के कानूनी और प्रशासनिक पहलू (आगे की कार्रवाई के लिए सुझाव) महिला सुरक्षा व नियमों का उल्लंघन (POSH / IPC Provisions) बिना महिला पुलिसकर्मी के घर में घुसकर महिलाओं के साथ कथित बदतमीजी करना ऊर्जा निगम/विजिलेंस टीम पर गंभीर विभागीय और कानूनी सवाल खड़े करता है। इसकी शिकायत राज्य महिला आयोग या पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी की जा सकती है। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (Prevention of Corruption Act) 1.50 लाख रुपये की अवैध वसूली (उत्कोच) के आरोपों और वीडियो साक्ष्यों के आधार पर एंटी-करप्शन ब्यूरो (विजिलेंस) में स्वतंत्र रूप से औपचारिक एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जा सकती है। मुख्यमंत्री पोर्टल (आईजीआरएस) फॉलो-अप चूंकि शिकायत दर्ज हो चुकी है, इसलिए पोर्टल पर मिलने वाले फीडबैक और जांच अधिकारी की रिपोर्ट पर कड़ी नजर रखें।