नानपारा (बहराइच)। नानपारा की सरजमीं पर जन्मे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त शायर एवं साहित्यकार शारिक़ रब्बानी को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में आयोजित एक साहित्यिक समारोह में सारस्वत सम्मान से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से नानपारा सहित साहित्यिक जगत में खुशी का माहौल है।
ग्वालियर के सीता मैनोर होटल में आयोजित समारोह में पुस्तक ‘प्रेमिल पंखुड़ियां’ का लोकार्पण, कवि सम्मेलन एवं सम्मान समारोह संपन्न हुआ। कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए साहित्यकारों, कवियों और साहित्यप्रेमियों ने शिरकत की।
शारिक़ रब्बानी की अब तक दस पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी रचनाओं का हिंदी, उर्दू, नेपाली, मराठी और अंग्रेजी भाषाओं में प्रकाशन हुआ है। उनके साहित्य में मानवता, गंगा-जमुनी तहजीब, महिला सशक्तीकरण और प्रगतिशील विचारों की झलक देखने को मिलती है। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब, ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, हाजी वारिस अली शाह के साथ भगवान श्रीकृष्ण, राधा और मीरा पर लिखी उनकी रचनाएं भी चर्चित हैं। सूफियाना विचारधारा और कृष्ण भक्ति पर लेखन के कारण उन्हें सूफी शायर और कृष्ण भक्त शायर के रूप में भी पहचान मिली है।
उनकी गजलों को देश के कई नामचीन गायक-गायिकाएं अपनी आवाज दे चुके हैं। समारोह में ग्वालियर के महेश भट्ट, सिडनी की उर्मि चक्रवर्ती, दिल्ली की राजरानी भल्ला एवं संतोष सम्प्रीति, मेरठ के श्रीपाल, देहरादून के डॉ. संतोष मिश्रा सोनी और जबलपुर की रजनी कटारे सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे।
ग्वालियर प्रवास के दौरान शारिक़ रब्बानी ने 1857 की क्रांति की वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई की समाधि पर पहुंचकर श्रद्धासुमन भी अर्पित किए।
वर्तमान में भोपाल में रह रहे शारिक़ रब्बानी भारतीय सांस्कृतिक सहयोग एवं मैत्री संघ (इस्कफ) की उत्तर प्रदेश इकाई के कार्यकारी अध्यक्ष तथा राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य हैं। साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पहले भी देश-विदेश में कई सम्मान मिल चुके हैं।
ग्वालियर में मिला यह सम्मान न केवल शारिक़ रब्बानी की साहित्यिक उपलब्धि है, बल्कि नानपारा के लिए भी गर्व का विषय है। अपनी रचनाओं और साहित्यिक गतिविधियों के माध्यम से उन्होंने नानपारा का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया है।