वैश्विक स्तर पर तेजी से बदल रहे घटनाक्रमों, अमेरिका में मध्यावधि चुनावों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाओं का असर भारतीय सराफा बाजार पर दिखाई दे रहा है। मिरज के सराफा व्यवसायी गौरव चिप्पलकट्टी और ओंकार शिखरे ने हमारे प्रतिनिधि से बातचीत के दौरान यह राय व्यक्त की।
गौरव चिप्पलकट्टी की ‘गोविंद वामन चिप्पलकट्टी’ नामक सराफा पेढ़ी पिछले 70 वर्षों से अधिक समय से इस व्यवसाय में कार्यरत है। वहीं, ओंकार शिखरे की ‘स्वामीराव कृष्णराव शिखरे’ नामक सराफा पेढ़ी भी ग्राहकों को अपनी सेवाएं प्रदान कर रही है। सोने और चांदी की कीमतों में जारी उतार-चढ़ाव के कारणों और बाजार की संभावित दिशा को समझने के लिए दोनों व्यवसायियों से बातचीत की गई।
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका से सोने पर दबाव
दोनों सराफा व्यवसायियों के अनुसार, अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की ओर से अक्टूबर के अंत में, लगभग 27 या 28 अक्टूबर को, ब्याज दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना को लेकर बाजार में चर्चा है। यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं या लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो अमेरिकी डॉलर मजबूत हो सकता है और अमेरिकी बॉन्ड की यील्ड में भी वृद्धि हो सकती है।
ऐसी स्थिति में निवेशकों के लिए बैंक जमा और सरकारी बॉन्ड जैसे ब्याज देने वाले विकल्प अधिक आकर्षक बन सकते हैं। दूसरी ओर, सोना ऐसा निवेश है जिससे नियमित ब्याज या आय प्राप्त नहीं होती। इसलिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका के बीच कुछ निवेशक सोने के बजाय ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं। इससे सोने की कीमतों पर दबाव पड़ने की संभावना रहती है।
अमेरिकी चुनावों का भी बाजार पर प्रभाव
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों से जुड़ी राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितता का असर भी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों पर पड़ सकता है। निवेशक चुनावों के संभावित परिणामों, सरकार की आर्थिक नीतियों और भविष्य की आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर अपने निवेश संबंधी फैसले लेते हैं।
इन्हीं वैश्विक परिस्थितियों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट देखने को मिल रही है। हालांकि, कीमती धातुओं की कीमतों में होने वाले बदलाव के पीछे केवल एक कारण नहीं होता। डॉलर की मजबूती, बॉन्ड यील्ड, वैश्विक मांग, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और निवेशकों की खरीद-बिक्री जैसे अनेक कारक भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
शनिवार को सोने के भाव में 4 हजार रुपये की गिरावट
सराफा व्यवसायियों के अनुसार, शनिवार को सोने की कीमत में अचानक लगभग 4 हजार रुपये की गिरावट दर्ज की गई। कीमतों में आई इस कमी से बाजार में ग्राहकों की दिलचस्पी बढ़ने की संभावना है। चांदी की कीमतों में भी गिरावट के चलते खरीदारी की योजना बना रहे लोगों को राहत मिल सकती है।
हालांकि, सोने और चांदी के भाव में वास्तविक बदलाव की पुष्टि के लिए संबंधित बाजार, कीमत की इकाई और तुलना की अवधि को ध्यान में रखना जरूरी है। अलग-अलग शहरों और बाजारों में दरों में अंतर हो सकता है।
दिवाली तक फिर बढ़ सकते हैं सोने के भाव
दोनों सराफा व्यवसायियों ने यह भी कहा कि मौजूदा गिरावट के बावजूद दिवाली तक सोने की कीमतों में फिर से तेजी आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। त्योहारों के दौरान सोने और चांदी की खरीदारी बढ़ने से मांग में वृद्धि हो सकती है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव भी घरेलू कीमतों की दिशा तय करेंगे।
इसलिए वर्तमान गिरावट को देखते हुए ग्राहकों के पास खरीदारी पर विचार करने का अवसर है। हालांकि, आगे कीमतें और गिरेंगी या फिर तेजी आएगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।
सराफा व्यवसायियों की सलाह: सोना-चांदी खरीदने की योजना बना रहे ग्राहकों को स्थानीय बाजार के ताजा भाव की जानकारी लेकर ही खरीदारी करनी चाहिए। आभूषण खरीदते समय शुद्धता, हॉलमार्क, मेकिंग चार्ज और लागू करों पर भी ध्यान देना आवश्यक है।