करवीर निवासिनी श्री महालक्ष्मी, अर्थात् श्री अंबाबाई के शारदीय नवरात्रि उत्सव की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। इसी के तहत कोल्हापुर स्थित श्री अंबाबाई मंदिर में मंगलवार को देवी के प्राचीन एवं ऐतिहासिक आभूषणों की वैज्ञानिक पद्धति से विधिवत सफाई की गई।
श्री अंबाबाई द्वारा धारण किए जाने वाले आभूषणों में शिवकालीन कावड़ों की माला, जिसमें श्री अंबा माता का स्वरूप प्रकट होता है, 16 पदरी चंद्रहार, सोने की पालकी, शेर, गदा, त्रिशूल, बोरमाल, मूर्तियों की माला, ठुशी, कुंडल, सोने का मुकुट, बाली, मछली, चाफेकली हार, पारंपरिक कोल्हापुरी साज, मंगलसूत्र लप्पा, पैरों की जूतियां, नथ तथा सतपदरी कंठी सहित अनेक आभूषण शामिल हैं। इनमें हीरा, माणिक, पन्ना सहित विभिन्न नौ रत्न जड़े हुए हैं।
शारदीय नवरात्रि उत्सव शुरू होने में अब केवल तीन दिन शेष हैं। इसके चलते श्री अंबाबाई मंदिर में स्वच्छता और अन्य तैयारियों को गति दी गई है। इसी क्रम में मंगलवार को देवी द्वारा धारण किए जाने वाले इन बहुमूल्य आभूषणों की विशेष पद्धति से सफाई की गई।
बताया जाता है कि श्री अंबाबाई के ये आभूषण शिवकाल, आदिलशाही काल तथा विभिन्न राजवंशों के समय देवी को अर्पित किए गए थे। इन आभूषणों की ऐतिहासिकता और प्राचीन संरचना को देखते हुए वर्तमान समय में इनका वास्तविक मूल्य निर्धारित करना बेहद कठिन माना जाता है।
इस संबंध में हमारे प्रतिनिधि ने मिरज सर्राफ एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील चिप्पलकट्टी तथा पदाधिकारी ओंकार शिखर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के ऐतिहासिक और प्राचीन आभूषणों का मूल्य वास्तव में अमूल्य है। चाहे ये आभूषण शिवकालीन हों अथवा किसी अन्य राजवंश के समय के, उनकी सफाई करते समय अत्यंत सावधानी बरतना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्राचीन आभूषणों की सफाई के लिए रसायनों के बजाय प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग करना अधिक उचित है। विशेष रूप से रेत तथा अन्य प्राकृतिक पदार्थों की सहायता से इन आभूषणों को बिना नुकसान पहुंचाए साफ किया जा सकता है। इसी प्राकृतिक पद्धति को ध्यान में रखते हुए श्री अंबाबाई के ऐतिहासिक आभूषणों की विधिवत सफाई की गई।