पीलीभीत/बाजपुर। उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले के बाजपुर में फर्जी स्थायी निवास और जाति प्रमाणपत्र तैयार कराने के मामले का खुलासा हुआ है। राजस्व विभाग की जांच के बाद पुलिस ने बरखेड़ा नगर पंचायत अध्यक्ष श्याम बिहारी भोजवाल समेत नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की है। जांच के दौरान चार लोगों के नाम से जारी प्रमाणपत्र निरस्त किए गए हैं।
मामला उत्तराखंड के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में अध्ययनरत छात्रों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान सामने आया। सत्यापन में कई दस्तावेजों में दर्ज पते, राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर, बिजली बिल, मतदाता सूची और शैक्षणिक अभिलेखों में अनियमितताएं मिलीं। मौके पर भौतिक सत्यापन कराने पर संबंधित पते और दस्तावेजों में भी विसंगतियां सामने आईं।
बेटे के प्रमाणपत्र भी निरस्त
जांच में श्याम बिहारी भोजवाल के बेटे अनुराग भोजवाल के नाम से बाजपुर क्षेत्र के पते पर जारी ओबीसी जाति प्रमाणपत्र और स्थायी निवास प्रमाणपत्र भी सामने आए। राजस्व विभाग के अनुसार दस्तावेजों के सत्यापन में अनियमितताएं मिलने के बाद दोनों प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए।
पूछताछ के दौरान श्याम बिहारी भोजवाल ने कथित तौर पर बताया कि बेटे के मेडिकल कॉलेज में दाखिले के लिए प्रमाणपत्र बनवाने के एवज में उन्होंने बरेली निवासी एक व्यक्ति को 50 हजार रुपये दिए थे। जांच में कथित फर्जी किरायेदार सत्यापन और अन्य लोगों की भूमिका की भी जानकारी सामने आई है।
छह मोबाइल फोन जब्त
राजस्व विभाग की तहरीर के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में कथित कूटरचित दस्तावेजों से संबंधित साक्ष्य मिले। इसके बाद छह मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य लोगों और दस्तावेजों की भूमिका की जांच कर रही है।
प्रशासन ने सामने आए 19 अन्य संदिग्ध प्रमाणपत्रों की जांच भी तेज कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक सत्यापन के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी विवादों में रहा नाम
श्याम बिहारी भोजवाल वर्ष 2023 के निकाय चुनाव से पहले अवैध शराब बरामदगी के मामले में गिरफ्तार होकर जेल गए थे। उस समय पुलिस और आबकारी विभाग की कार्रवाई में उनके पास से शराब बरामद होने की बात सामने आई थी।
सितंबर 2026 में बरखेड़ा में जन्माष्टमी मेले की तैयारियों को लेकर उनका पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता के साथ विवाद भी सामने आया था। दोनों पक्षों के बीच कहासुनी और धक्कामुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
फर्जी प्रमाणपत्र प्रकरण में प्रशासन अब दस्तावेज तैयार कराने वाले लोगों, कथित मध्यस्थों और इससे लाभ लेने वाले अन्य व्यक्तियों की भूमिका की जांच कर रहा है। मामले में पुलिस की जांच पूरी होने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट: अमित दीक्षित, पीलीभीत