सन्मति वात्सल्य पावन वर्षायोग के अवसर पर मिरज में चल रहे चातुर्मास के दौरान दशलक्षण पर्व धार्मिक एवं भक्तिमय वातावरण में उत्साहपूर्वक मनाया गया। परमपूज्य आचार्य श्री 108 विदेहसागर मुनि महाराज एवं सुगम्यसागर मुनि महाराज के सान्निध्य और मार्गदर्शन में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। मिरज शहर सहित आसपास के गांवों से करीब 400 श्रावक-श्राविकाओं ने पर्व में उत्स्फूर्त सहभागिता दर्ज कराई।
दशलक्षण पर्व के समापन अवसर पर अनंत पूर्णिमा के दिन भगवान श्री अनंतनाथ की भव्य पालकी शोभायात्रा निकाली गई। आकर्षक पालकी, घोड़े, बैंड और विभिन्न वाद्ययंत्रों के गजर के बीच निकली इस शोभायात्रा में जैन समाज के बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। नेमिनाथ मंदिर से शुरू हुई शोभायात्रा लोणी बाजार, दत्त चौक, लक्ष्मी मार्केट, महाराणा प्रताप चौक और सराफ कट्टा मार्ग से होते हुए पुनः मंदिर पहुंची। पूरे मार्ग पर भक्तिमय वातावरण बना रहा।
पद्मिनी पाटील की दस दिवसीय निरंकार तपश्चर्या बनी विशेष आकर्षण
दशलक्षण पर्व का विशेष आकर्षण प्रतिमाधारी श्रीमती पद्मिनी पाटील द्वारा की गई लगातार दस दिनों की निरंकार उपवास तपश्चर्या रही। आचार्य श्री 108 विदेहसागर मुनि महाराज के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में उन्होंने यह उपवास पूर्ण किया। उपवास की सांगता के बाद धार्मिक विधि-विधान के साथ पारणा कार्यक्रम संपन्न हुआ, जिस पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनकी तपश्चर्या की सराहना की।
पारणा के बाद श्रीमती पद्मिनी पाटील की रथ में मिरज शहर के प्रमुख मार्गों से वाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा निकाली गई। इसमें बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने शामिल होकर धार्मिक उत्साह व्यक्त किया।
भगवान श्री अनंतनाथ की पालकी शोभायात्रा मंदिर में पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं की उपस्थिति में पंचामृत अभिषेक किया गया। इसके बाद श्रावक-श्राविकाओं के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। आचार्य श्री विदेहसागर मुनि महाराज एवं सुगम्यसागर मुनि महाराज के सान्निध्य में संपन्न इस धार्मिक आयोजन से मिरज नगरी में श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण देखने को मिला।