पुणे विभाग स्नातक एवं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है। आचार संहिता का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन फलक, होर्डिंग, दीवारों पर लगे पोस्टर तथा सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद राजनीतिक प्रचार सामग्री को तत्काल हटाने के निर्देश विभागीय आयुक्त शीतल तेली-उगले ने प्रशासन को दिए हैं।
इस पृष्ठभूमि में गणेशोत्सव के अवसर पर मिरज शहर में लगाए गए स्वागत द्वारों पर नेताओं के फोटो, राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह और राजनीतिक संदेश वाले फलक अब हटाए जाएंगे क्या? यह सवाल उठने लगा है।
गणेशोत्सव के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों में गणेश मंडलों की ओर से स्वागत द्वार लगाए गए हैं। इनमें से कुछ स्वागत द्वारों पर प्रमुख नेताओं के फोटो, राजनीतिक दलों के चिन्ह अथवा राजनीतिक स्वरूप के संदेश दिखाई दे रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद ऐसे फलक चुनाव प्रशासन की नजर में आने की संभावना है।
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार सरकारी संपत्ति पर लगे अनधिकृत राजनीतिक विज्ञापन, होर्डिंग और बैनर आदि हटाने के लिए निर्धारित समय-सीमा है। सार्वजनिक संपत्ति एवं सार्वजनिक स्थानों पर लगे अनधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों को हटाने की कार्रवाई भी करनी होती है। निजी संपत्ति पर लगे अनधिकृत राजनीतिक विज्ञापनों के संबंध में भी स्थानीय कानून और संबंधित निर्देश लागू होते हैं।
‘फोटो’ या ‘राजनीतिक प्रचार’—कार्रवाई इसी आधार पर?
केवल गणेशोत्सव के धार्मिक अथवा सामाजिक उद्देश्य से लगाया गया स्वागत द्वार होने के कारण उसे स्वतः हटाया जाएगा, यह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। हालांकि, यदि उस पर किसी राजनीतिक दल का चिन्ह, नेता का फोटो अथवा प्रचारात्मक संदेश मौजूद है, तो संबंधित फलक आदर्श आचार संहिता के दायरे में आता है या नहीं, इसकी प्रशासन द्वारा जांच की जानी अपेक्षित है। इसलिए मिरज में ऐसे स्वागत द्वारों को लेकर प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है।
आचार संहिता का उल्लंघन होने पर मामला दर्ज होगा?
विभागीय आयुक्त ने आचार संहिता का उल्लंघन पाए जाने पर तत्काल मामला दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुसार यदि अनधिकृत राजनीतिक स्वरूप की सामग्री संबंधित लोगों द्वारा स्वयं नहीं हटाई जाती है, तो प्रशासन की ओर से उसे हटाने की कार्रवाई की जा सकती है। लागू कानून के अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
इसलिए अब मिरज में नेताओं के फोटो और राजनीतिक दलों के चिन्ह वाले गणेशोत्सव स्वागत द्वार प्रशासन हटाएगा क्या? संबंधित गणेश मंडलों को नोटिस जारी किए जाएंगे क्या? और यदि आचार संहिता का उल्लंघन पाया गया तो वास्तव में कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाएगी? इस पर शहरवासियों की नजर बनी हुई है।