जिले में सूखे जैसी स्थिति के प्रभाव को कम करने, उपलब्ध जल का संरक्षण करने, भूजल स्तर में सुधार लाने और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से सोख्ता गड्ढों का निर्माण, भूजल पुनर्भरण तथा हरित आवरण को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके लिए जिलाधिकारी तथा जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की अध्यक्ष तृप्ति धोडमिसे ने जिले के संबंधित विभागों को विभिन्न उपाययोजनाएं लागू करने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में 12 अक्टूबर को आदेश क्रमांक 6 जारी किया गया है।
सोख्ता गड्ढों के निर्माण के लिए नगर परिषदों, नगर पंचायतों और ग्राम पंचायतों के अंतर्गत आने वाले सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, आंगनवाड़ियों, सार्वजनिक भवनों, उद्यानों, खाली भूखंडों तथा अन्य उपयुक्त स्थानों का सर्वेक्षण कर तकनीकी रूप से उचित स्थलों का चयन करने के निर्देश दिए गए हैं। वर्षा के पानी को जमीन में समाहित कर भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने और मिट्टी में नमी बनाए रखने के उद्देश्य से सोख्ता गड्ढों के निर्माण का कार्य सुनियोजित तरीके से किया जाना चाहिए। इसके साथ ही पेड़-पौधों का संरक्षण करने और आसपास के क्षेत्रों में हरियाली बनाए रखने के लिए आवश्यक पूरक उपाय भी किए जाएं।
सार्वजनिक भवनों और आवासीय परिसरों में उत्पन्न होने वाले अपेक्षाकृत कम दूषित पानी का उचित प्रबंधन कर उसका उपयोग बागवानी, वृक्षों के संरक्षण तथा अन्य गैर-पेय कार्यों के लिए पुनः किया जाए। भूजल प्रदूषण रोकने के लिए बिना उपचार किए गए गंदे पानी को सोख्ता गड्ढों, कुओं या बोरवेल में नहीं छोड़ा जाए। सोख्ता गड्ढों का स्थान, उनकी संरचना और उनमें उपयोग किए जाने वाले पानी के स्रोतों का निर्धारण करते समय भूजल प्रदूषण की आशंका को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सावधानी बरती जाए।
इसके अलावा, सार्वजनिक एवं निजी कुओं, बोरवेल तथा अन्य मौजूदा जलस्रोतों की स्थिति का निरीक्षण कर तकनीकी रूप से व्यवहार्य और सुरक्षित स्थानों पर भूजल पुनर्भरण के लिए आवश्यक उपाय किए जाएं।
जल बचत, पानी के पुनः उपयोग, सोख्ता गड्ढों के निर्माण, भूजल पुनर्भरण और हरियाली संरक्षण के महत्व को लेकर नागरिकों में जनजागृति की जाए। पानी के अनावश्यक उपयोग को रोकने और उपलब्ध जलस्रोतों का संरक्षण करने के लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएं।
इन सभी कार्यों के लिए उपयुक्त स्थलों, भूजल पुनर्भरण की संभावनाओं, हरियाली संरक्षण संबंधी उपायों तथा आवश्यक निधि का विवरण शामिल करते हुए कार्ययोजना तैयार की जाए। किए गए कार्यों की विस्तृत रिपोर्ट 16 अक्टूबर 2026 तक जिलाधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी तृप्ति धोडमिसे ने स्पष्ट किया है कि सभी उपाययोजनाओं को लागू करते समय प्रचलित नियमों, तकनीकी मानकों और पर्यावरण संबंधी मानदंडों का पालन करते हुए आवश्यक कार्रवाई तत्काल की जाए।