यह बेहद गंभीर और चिंताजनक मामला है। पुलिस हिरासत में किसी भी व्यक्ति के साथ मारपीट करना, कानूनन अपराध होने के साथ-साथ मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। साथ ही, घायल होने पर समय पर चिकित्सा (Medical Aid) और मेडिकल रिपोर्ट/चीट उपलब्ध न कराना पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।
मेडिकल परीक्षण और एमएलसी (MLC - Medico-Legal Certificate):
सबसे पहले महिला का किसी बड़े अस्पताल या जिला अस्पताल में स्वतंत्र रूप से मेडिकल परीक्षण कराएं और उसकी एमएलसी (MLC) की कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें। यह पुलिस के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का सबसे बड़ा सबूत होती है।रुड़की सिविल अस्पताल या मंगलौर सरकारी अस्पताल में इलाज के दौरान जितने भी पर्चे, डॉक्टर की सलाह या रिपोर्ट मिले, उन सबकी फोटोकॉपी और ओरिजिनल संभाल कर रखें। एंबुलेंस (112) को कॉल करने का रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखें। कानूनी और प्रशासनिक शिकायत कहाँ करें?यदि स्थानीय पुलिस या अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं,पुलिस अधीक्षक (SP) या वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) Haridwarआप सीधे हरिद्वार के एसएसपी या संबंधित जिले के उच्च पुलिस अधिकारियों को लिखित शिकायत दे सकते हैं। इसमें घटना का पूरा विवरण (तारीख, समय, 112 कॉल का जिक्र) स्पष्ट रूप से लिखें।राज्य मानवाधिकार आयोग (State Human Rights Commission)
कस्टडी (हिरासत) में हिंसा और इलाज से वंचित रखने के मामले में मानवाधिकार आयोग स्वतः संज्ञान भी लेता है और पीड़ित परिवार की शिकायत पर कड़ी कार्रवाई करता है। आप उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में इसकी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।राष्ट्रीय महिला आयोग (National Commission for Women - NCW)
चूंकि मामला महिला से जुड़ा है और उसके साथ दुर्व्यवहार हुआ है, आप महिला आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन के जरिए भी इसकी शिकायत कर सकते हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट (Judicial Magistrate) के समक्ष प्रार्थना पत्र आप वकील की मदद से सीधे स्थानीय अदालत (Court) में सीआरपीसी/बीएनएस के प्रावधानों के तहत पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के लिए प्रार्थना पत्र दे सकते हैं।