मरवाही फॉरेस्ट में खुली लापरवाही : बरसात में खुले में सड़ रही वन विभाग की लाखों की वर्मी कम्पोस्ट,

सूरज यादव,गौरेला पेंड्रा मरवाही। सरकार एक ओर पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने और जंगल के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर मैदानी स्तर पर लापरवाही के कारण लाखों रुपये की सामग्री बर्बाद होने की कगार पर है।मरवाही वन परिक्षेत्र में चल रहे बड़े पौधरोपण कार्यक्रम के लिए लाई गई *सैकड़ों टन वर्मी कम्पोस्ट खाद* बीते कई दिनों से खुले आसमान के नीचे डंप पड़ी है। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण यह खाद पूरी तरह भीगकर गुणवत्ता हीन हो रही है।

कटरा फॉरेस्ट बीट में दिखा लापरवाही का नमूना:
जानकारी के अनुसार वन विभाग द्वारा कटरा बीट अंतर्गत ढपनी पानी के गाड़ा ढीलान नामक स्थान पर हजारों की संख्या में पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। आमतौर पर पौधों के रोपण के समय सड़ी हुई गोबर की खाद डाली जाती रही है, लेकिन इस बार विभाग ने पौधों के बेहतर विकास के लिए लाखों रुपये की लागत वाली वर्मी कम्पोस्ट मंगवाई थी। लेकिन इस महंगी खाद को रखने के लिए न तो कोई शेड बनाया गया, न ही तिरपाल से ढकने की व्यवस्था की गई। नतीजतन पूरी खाद खुले में बारिश में भीग रही है।
ग्रामीणों में आक्रोश, गुणवत्ता पर उठे सवाल:
इस लापरवाही से स्थानीय ग्रामीणों में भारी निराशा है। कटरा के ग्रामीण *सूरज प्रसाद* ने कहा कि _"इस तरह लाखों रुपये की खाद को पानी में पड़ा रहने देने से इसकी गुणवत्ता पूरी तरह खराब हो जाएगी। वर्मी कम्पोस्ट में जो पोषक तत्व होते हैं जो नए पौधों की जड़ों के विकास के लिए जरूरी हैं, वो इस बारिश से धुल जाएंगे। इस तरह की घटिया खाद डालने से पौधरोपण का उद्देश्य ही विफल हो जाएगा।"_ ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के अधिकारियों की अनदेखी के कारण ही निम्न स्तर का काम हो रहा है, जिससे सरकार के निर्धारित लक्ष्य भी भविष्य में पूरे नहीं हो पाएंगे।
रेंजर ने दिया सफाई, जल्द सुधार का आश्वासन...
मामले की जानकारी मिलने पर *मरवाही रेंजर मुकेश साहू* ने कहा, _"मुझे आपके माध्यम से जानकारी मिल रही है कि वर्मी कम्पोस्ट खाद खुले में रखी हुई है। मामले को संज्ञान में लिया गया है और जल्द ही उस खाद को व्यवस्थित करवाकर सुरक्षित स्थान पर रखवाया जाएगा।"_
सवालों के घेरे में विभाग:
यह मामला एक बार फिर वन विभाग की कार्यप्रणाली और निगरानी पर सवाल खड़े करता है। जब सरकार पौधरोपण के लिए गुणवत्ता पर जोर दे रही है, तो मैदान में इस तरह की लापरवाही से न सिर्फ सरकारी धन का नुकसान हो रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी पानी फिर रहा है। अब देखना होगा कि रेंजर के आश्वासन के बाद विभाग इस खाद को कब तक सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर पाता है।