गणेशोत्सव के ऐन मौके पर भाग्यश्री दासानी द्वारा मीडिया को गुमराह किया जा रहा है। मेरी तबीयत को लेकर उनके द्वारा दिए गए बयान गलत हैं। मैं वर्तमान में पूरी तरह स्वस्थ और ठीक हूं। आज भी मुझमें दो-चार लोगों को पटखनी देने की ताकत है। संस्थान द्वारा युवराज आदित्यराजे को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह कानूनी है। युवराज आदित्यराजे ही संस्थान के कानूनी उत्तराधिकारी हैं और संस्थान का कार्यभार वही संभालेंगे। यह स्पष्ट मत सांगली पंचायतन संस्थान के अधिपति राजा विजयसिंह पटवर्धन ने एक बयान के माध्यम से व्यक्त किया है।
अपने बयान में उन्होंने आगे कहा कि संस्थान का राजा ही सोल मैनेजिंग ट्रस्टी होता है और उसके पास संस्थान की धार्मिक एवं प्रशासनिक जिम्मेदारियां होती हैं। गणेशोत्सव के दौरान भाग्यश्री दासानी ने बेहद गैर-जिम्मेदाराना तरीके से सभी कार्य किए हैं।
संस्थान के व्यवस्थापक जयदीप अभ्यंकर उन्हें रीति-रिवाज और परंपराओं का पालन करते हुए दोबारा आरती न करने के लिए समझा रहे थे। इस दौरान भाग्यश्री ने उनके साथ बेहद अपमानजनक भाषा में बात की, ऐसा आरोप विजयसिंह राजे पटवर्धन ने लगाया। उन्होंने कहा कि अभ्यंकर भाग्यश्री के सगे ममेरे/मौसेरे भाई हैं, इस बात का ध्यान उन्हें रखना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि उत्सव के दौरान श्री गणेश की पूजा-अर्चना उन्होंने स्वयं अपनी पत्नी के साथ की है। इसलिए उनके बारे में मीडिया को यह गलत जानकारी दी गई कि वे बीमार हैं और बिस्तर पर हैं। उन्होंने कहा कि यह जानकारी पूरी तरह गलत है।
राजा विजयसिंह पटवर्धन ने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर में मौजूद ब्रह्मवृंद के साथ भाग्यश्री ने अनुचित व्यवहार किया है और उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। संस्थान में गुरुजी को पूजा-अर्चना के बाद सम्मान का स्थान प्राप्त होता है। हम उनका आशीर्वाद लेते हैं और उनके प्रति हमारे मन में आदर का भाव है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि हमने युवराज आदित्यराजे को अपना कानूनी उत्तराधिकारी स्वीकार किया है और वही संस्थान के उत्तराधिकारी हैं।