शहर की सांस्कृतिक पहचान और गौरव का प्रतीक माना जाने वाला बालगंधर्व नाट्यगृह आज भी विभिन्न समस्याओं से घिरा हुआ है। नाट्यगृह के रखरखाव और मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद इसकी स्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं सुधरने से कलाकारों, कला-रसिकों और नागरिकों में नाराजगी व्यक्त की जा रही है।
मिरज शहर को संगीत, नाटक और सांस्कृतिक क्षेत्र की समृद्ध परंपरा विरासत में मिली है। इस परंपरा को संजोने वाले महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में बालगंधर्व नाट्यगृह की पहचान है। हालांकि, नाट्यगृह में विभिन्न सुविधाओं का अभाव, रखरखाव की अनदेखी और प्रबंधन में कमियों के कारण इस सांस्कृतिक वास्तु का गौरव धीरे-धीरे कम होता जा रहा है, ऐसी भावना नागरिकों द्वारा व्यक्त की जा रही है।
नाट्यगृह की इमारत की मरम्मत, आंतरिक सुविधाओं, बैठने की व्यवस्था, विद्युत व्यवस्था सहित अन्य कार्यों पर बड़े पैमाने पर निधि खर्च की गई है। लेकिन खर्च की तुलना में वास्तविक सुविधाओं में अपेक्षित सुधार हुआ है या नहीं, यह सवाल अब उठने लगा है। लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि नाट्यगृह की स्थिति संतोषजनक नहीं है, तो इन कार्यों की गुणवत्ता और नियोजन की जांच की जानी चाहिए, ऐसी मांग की जा रही है।
नाट्यगृह में कार्यक्रम आयोजित करने वाले कलाकारों और आयोजकों को भी विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ध्वनि व्यवस्था, प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, रंगमंच की स्थिति, दर्शकों के लिए सुविधाएं और पार्किंग जैसी बुनियादी सुविधाओं पर अधिक गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
मिरज की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने के लिए बालगंधर्व नाट्यगृह का संरक्षण और संवर्धन करना बेहद जरूरी है। शहर के कलाकारों, नाट्यप्रेमियों और सांस्कृतिक संस्थाओं ने प्रशासन से नाट्यगृह की समस्याओं की ओर तत्काल ध्यान देने की अपेक्षा व्यक्त की है।
निधि का उचित उपयोग हुआ या नहीं?
नाट्यगृह की मरम्मत और सौंदर्यीकरण के लिए खर्च की गई निधि का विवरण, किए गए कार्य, उनकी गुणवत्ता और वर्तमान स्थिति के संबंध में प्रशासन को पारदर्शी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ऐसी मांग जोर पकड़ रही है। केवल निधि खर्च करने के बजाय उससे नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सांस्कृतिक सुविधाएं उपलब्ध होना आवश्यक है।
क्या बालगंधर्व नाट्यगृह को फिर मिलेगा अपना पुराना गौरव?
मिरज के सांस्कृतिक इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान रखने वाले इस नाट्यगृह को प्रशासन को केवल एक इमारत के रूप में नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक विरासत के हिस्से के रूप में देखना चाहिए। आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराकर नाट्यगृह का नियमित उपयोग बढ़ाने के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार करने की मांग की जा रही है।
करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद मिरज की सांस्कृतिक धरोहर बालगंधर्व नाट्यगृह की हालत जैसे थे
16 August 2026
•
सुधीर गोखले
•
3 Min Read
•
14 Views
Published:
16 August 2026, 09:43 AM
Last Updated:
16 August 2026, 01:46 PM
बालगंधर्व नाट्यगृह (संग्रहित तस्वीर)
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By सुधीर गोखले
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