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समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र में सियासी पारा काफी बढ़ गया है

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राजीव कुमार सिन्हा
समस्तीपुर

समस्तीपुर लोकसभा क्षेत्र में सियासी पारा काफी बढ़ गया है ।

हालांकि जेडीयू से बिहार सरकार में मंत्री व पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष महेश्वर हजारी के पुत्र के कांग्रेस में शामिल होते ही यंहा नीतीश कुमार के दो मंत्रियों के बीच सीधी लड़ाई की अटकलें तेज हो गई है . नीतीश के खास माने जाने वाले मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी पहले ही इस क्षेत्र से लोजपा(रामविलास) की प्रत्याशी बनायी जा चुकी हैं. अब नीतीश के एक दूसरे मंत्री महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी हजारी कांग्रेस में शामिल होते ही उनकी उम्मीदवारी को लेकर चर्चा जोर हो गया है ।हालांकि टिकट को लेकर कोई ऐसा ऑफिसियल घोषणा नही हो पाया है ।अगर कांग्रेस उन्हें समस्तीपुर से उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार देता है तो नीतीश ले दो मंत्रियों के बेटे और बेटी चुनावी मैदान में होंगे ।सूत्रों की माने तो नीतीश सरकार में सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी के बेटे सन्नी हजारी को कांग्रेस में उन्होंने ही शामिल करवाया है ।क्योंकि सन्नी हजारी खानपुर से प्रमुख हैं लेकिन वो प्रदेश की राजनीति से कोसो दूर रहें है ।वही कांग्रेस सूत्रों की मानें तो टिकट तय होने के बाद ही महेश्वर हजारी ने अपने बेटे को कांग्रेस में शामिल करवाया है. वैसे महेश्वर हजारी अपने बेटे को पहले लोजपा (रामविलास) का टिकट दिलाने की कोशिशों में लगे थे. उन्होंने अपने बेटे के साथ दिल्ली जाकर चिराग पासवान से मुलाकात भी की थी. महेश्वर हजारी चिराग पासवान के निकट संबंधी भी हैं. लेकिन चिराग पासवान ने सन्नी हजारी को टिकट नहीं दिया. समस्तीपुर से मंत्री अशोक चौधरी की बेटी शांभवी चौधरी को टिकट दिया गया है.तभी महेश्वर हजारी ने कांग्रेस से डील तय होने के बाद ही सन्नी हजारी पार्टी में शामिल हुए हैं. वैसे भी समस्तीपुर सीट पर कांग्रेस के पास कोई मजबूत उम्मीदवार नहीं था. लिहाजा महेश्वर हजारी के बेटे मजबूत उम्मीदवार साबित हो सकते हैं.ऐसे में समस्तीपुर में अब नीतीश कुमार के दो मंत्रियों के बीच लडाई होने जा रही है. मंत्री अशोक चौधरी अपनी बेटी शांभवी चौधरी के लिए मोर्चा संभाल चुके हैं. गुरूवार को उन्हें अपनी निगरानी में बेटी से समस्तीपुर में रोड शो करवाया है. समस्तीपुर में पूरी जेडीयू अशोक की बेटी के लिए जी-जान से लगी है. हालांकि महेश्वर हजारी खुलकर अपने बेटे के लिए प्रचार और मोर्चाबंदी नहीं कर सकते. उन्होंने अपने बेटे को विपक्षी गठबंधन से टिकट दिलाने की तैयारी की है. लेकिन पर्दे के पीछे से महेश्वर हजारी ही बेटे को सांसद बनाने के लिए मोर्चा संभालेंगे.

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