रिपोर्टर राहुल चौहान
भेरूंदा
शासकीय महाविद्यालय के बच्चों ने खेल सामग्री को लेकर एसडीएम को दिया ज्ञापन,,, शिक्षकों के आपसी मतभेद के चलते बच्चे हो रहे परेशान,,,
भैरूंदा। जानकारी अनुसार भेरूंदा के स्वामी विवेकानंद शासकीय स्नातक महाविद्यालय भेरूंदा का है जहां पर शासकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा एसडीम मदन सिंह रघुवंशी को एक ज्ञापन दिया जिसमें उनके द्वारा बताया गया कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा खेलकूद सामग्री हेतु 275000 हजार की राशि प्राप्त हुई है जिनकी समय सीमा 30 सितंबर है लेकिन महाविद्यालय के प्रोफेसर एस एस मीना एवं डॉक्टर बालवीर राठौर द्वारा क्रय समिति में हस्ताक्षर करने एवं टेंडर डालने से मना कर दिया गया जिससे बच्चों की साल भर की मेहनत पर पानी फिर रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है।
एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी ने तीखे स्वरों में शासकीय महाविद्यालय स्टाफ को दी समझाइश।

जानकारी प्राप्त होने के बाद भेरूंदा एसडीएम मदन सिंह रघुवंशी द्वारा तत्काल प्रभाव से कॉलेज परिसर पहुंच कर प्रोफेसर एवं प्रिंसिपल को तीखे स्वरों में हिदायत दी गई कि भविष्य में इस तरह की कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों के अनुसार खेल सामग्री की व्यवस्था की जाए जिससे कि छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना न करना पड़े।
छात्र-छात्राएं स्वयं अपनी जेब से पैसे झूठा कर खेल सामग्री लेने को मजबूर,,,,
महाविद्यालय के छात्र एवं छात्राओं द्वारा जानकारी देते हुए बताया गया की महाविद्यालय के शिक्षकों के द्वारा जो उच्च शिक्षा विभाग से खेल सामग्री के लिए फंड आया है उसके रिलीज के लिए आपसी मतभेद के चलते माना कर दिया गया और जब इसकी शिकायत प्रिंसिपल से की गई। छात्रों द्वारा कहा गया की यदि उक्त फंड 30 सितंबर तक रिलीज नहीं हो पाया तो लेप्स हो जाएगा और इसका खामियाजा हम छात्रों को भुगतना पड़ेगा और हमारी साल भर की मेहनत खराब हो जाएगी साथ ही छात्रों ने यह भी बताया कि हमें जिला स्तरीय या राज्य स्तरीय खेलने के लिए सामग्री नहीं होने के कारण आपस में पैसे जुटा कर सामग्री खरीदनी पड़ रही है
वही महाविद्यालय की क्रीडा शिक्षक का कहना है की मीटिंग में फंड को रिलीज करने की बात कही गई तो इन लोगों के द्वारा साइन करने से मना कर दिया गया और डॉक्यूमेंट फाड़कर फेंक दिए जाते हैं। क्रीडा अधिकारी आकांक्षा उज्जैनीया का कहना है की मीना सर और राठौर सर द्वारा शासकीय कार्य में बाधा डाली जाती है।
* अधिकांश महाविद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाएं रहते हैं नदारत*
शासकीय महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा बताया गया की अधिकांश शिक्षक शिक्षिकाए आते हैं और अंगूठा लगाकर वापस चले जाते हैं कभी चाय पीने के बहाने से भी शिक्षक बाहर चले जाते है और बच्चे परेशान होते रहते हैं साथ ही क्रीडा शिक्षिका आकांक्षा उज्जैनियाअतिथि विद्वान का कहना है कि महिला शिक्षिकाएं 10:00 बजे आकर थम लगाकर चले जाते हैं फिर 12:00 आते हैं और फिर 3:00 बजे वापस चले जाते हैं और 5:00 बजे जाकर फिर अंगूठा लगाकर चले जाते हैं इस तरह से बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है
शासकीय महाविद्यालय प्राचार्य को नहीं रहती कोई जानकारी।
जब महाविद्यालय प्राचार्य से उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आए गए फंड को रिलीज क्यों नहीं किया गया उसकी जानकारी ली गई तो उन्होंने बताया की फंड जुलाई में आ गया था जिसकी जानकारी हमें बहुत बाद में प्राप्त हुई । इस फंड को रिलीज के लिए मीटिंग रखी गई लेकिन एस एस मीना और राठौर सर द्वारा साइन करने से मना कर दिया गया उनका कहना था कि आपका रिटायरमेंट होने वाला है आपके रिटायरमेंट के बाद नए प्राचार्य के आने पर इस फंड को रिलीज किया जाएगा

















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