रिपोर्टर नाजिम अली
मुरादाबाद डीआईजी पर हमले में 16 आरोपी दोषी करार, 27 मार्च को सजा का ऐलान,

15 साल पुराने मुरादाबाद हिंसा कांड में अदालत सख्त, तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत; बवाल के दौरान डीआईजी पर हुआ था जानलेवा हमला
मुरादाबाद। बहुचर्चित मैनाठेर बवाल मामले में सोमवार को अदालत ने अहम फैसला सुनाते हुए तत्कालीन डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमले के केस में 16 आरोपियों को दोषी करार दिया है। अपर जिला जज (एडीजे-2) की अदालत ने यह निर्णय सुनाया। अब दोषियों को सजा 27 मार्च को सुनाई जाएगी।
करीब 15 साल पुराने इस मामले में पुलिस ने कुल 19 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। हालांकि, सुनवाई के दौरान तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है, जिसके चलते 16 पर ही फैसला आया है।
यह घटना 6 जुलाई 2011 की है, जब मैनाठेर थाना क्षेत्र के असालतनगर बघा गांव में पुलिस एक छेड़खानी के आरोपी की गिरफ्तारी के लिए दबिश देने पहुंची थी। इस दौरान परिजनों ने पुलिस पर धार्मिक पुस्तक के अपमान का आरोप लगाया, जिसके बाद मामला भड़क गया और क्षेत्र में तनाव फैल गया।
देखते ही देखते भीड़ उग्र हो गई और मुरादाबाद-संभल मार्ग पर कई स्थानों पर जाम लगा दिया गया। हिंसक भीड़ ने मैनाठेर थाने में आगजनी की और डींगरपुर क्षेत्र में पुलिस चौकी व पीएसी के वाहनों को भी फूंक दिया।

स्थिति को काबू में करने के लिए तत्कालीन डीएम राजशेखर और डीआईजी अशोक कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे। डींगरपुर तिराहे पर हालात का जायजा लेने के दौरान भीड़ ने दोनों अधिकारियों पर हमला कर दिया। आरोप है कि उस समय डीआईजी के साथ मौजूद पुलिसकर्मी उन्हें छोड़कर पीछे हट गए थे।
हमले में डीआईजी गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उन पर फायरिंग भी की गई थी। बाद में अन्य जिलों से फोर्स बुलाकर हालात को नियंत्रित किया गया और घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया कोर्ट ने इन हमलावरों को दोषी करार दिया डीआईजी अशोक कुमार सिंह पर हमले के मामले में उनके पीआरओ रवि चौधरी की ओर से मैनाठेर थाने में एक एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामले का ट्रायल अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-2 कृष्ण कुमार सिंह की अदालत में हुआ।
इस मामले में कोर्ट ने सोमवार को मंजूर अहमद पुत्र मोहम्मद यूनुस निवासी डींगरपुर मुरादाबाद, मोहम्मद अली पुत्र अफसर निवासी डींगरपुर, हाशिम पुत्र हाजी भोलू निवासी ललवारा थाना मैनाठेर मुरादाबाद, फिरोज पुत्र नन्हें निवासी ताहरपुर थाना मैनाठेर, कमरूल पुत्र बाबू, मोहम्मद नाजिम पुत्र मोहम्मद हुसैन निवासी असदपुर थाना मैनाठेर, मोहम्मद यूनुस पुत्र मोहम्मद यूसुफ, मोहम्मद रिजवान पुत्र मुस्तफा निवासी लालपुर थाना मैनाठेर, अम्बरीश पुत्र अनवार निवासी शाहपुर चमारान मुरादाबाद, कासिम पुत्र इकबाल निवासी परयावली थाना असमोली मुरादाबाद (वर्तमान में संभल), मोहम्मद मोबीन उर्फ मोहम्मद मोहसिन पुत्र शौकत निवासी बरखेड़ा थाना डिडौली अमरोहा, परवेज आलम पुत्र आसिफ निवासी मिलक फतेहपुर थाना मैनाठेर मुरादाबाद, मोहम्मद मुजीब पुत्र बाबू जमील उर्फ जमीर अहमद, तहजीब आलम पुत्र हाजी जमील उर्फ जमीर अहमद निवासी असदपुर थाना मैनाठेर और जाने आलम पुत्र जुम्मा निवासी मिलक नवाब थाना मैनाठेर मुरादाबाद को दोषी करार दिया है।
दरअसल डीआईजी को सूचना मिली थी कि बवाल मुरादाबाद-संभल रोड पर मैनाठेर में हो रहा है। उन्हें उससे कई किमी पहले डींगरपुर में भीड़ जुटने की सूचना नहीं थी। डीआईजी और डीएम एसईजेड बाईपास से होते हुए जैसे ही डींगरपुर चौराहे पर पहुंचे वहां भीड़ चौराहे पर आगजनी और उपद्रव कर रही थी। डीआईजी ने भीड् को समझाने के लिए लाउडहेलर से बोलना शुरू किया। इतने में भीड़ और भी उग्र हो गई। भीड़ ने अधिकारियों पर ही पथराव शुरू कर दिया।
यह देख तत्कालीन डीएम राजशेखर अपनी कार में बैठे और एसईजेड गेस्ट हाउस की तरफ चल दिए। चूंकि डीएम और डीआईजी एक ही गाड़ी में बैठकर घटनास्थल पर पहुंचे थे इसलिए डीएम की गाड़ी को दौड़ता देख डीआईजी के हमराही समझे कि डीएम और डीआईजी मौके से निकल गए हैं। ऐसे में डीआईजी के हमारी भी अपनी गाड़ी लेकर डीएम की कार के पीछे चल दिए। एसईजेड गेस्ट हाउस पहुंचने के बाद पता चला कि डीआईजी और उनका पीआरओ मौके पर ही छूट गए हैं।
उधर, डीआईजी को अकेला पाकर भीड़ ने उन पर हमला कर दिया। जान बचाने के लिए अशोक कुमार सिंह डींगरपुर चौराहे के पास में स्थित पेट्रोल पंप पर पहुंचे और खुद को कैश रूम में लॉक कर लिया था। भीड़ से बचने की कोशिश में उनकी सर्विस पिस्टल भी मौके पर ही गिर गई थी। भीड़ ने इसके बाद पेट्रोल पंप के कैशरूम की दीवार तोड़कर डीआईजी को मरणांसन्न् हालत में पहुंचा था। डींगरपुर पुलिस चौकी में भी आग लगा दी थी।















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