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आदिवासी बच्चों की जान जोखिम में: मेंढ़ुका आंगनबाड़ी केन्द्र हादसा, GPM महिला बाल विकास विभाग कि घोर लापरवाही,

आदिवासी बच्चों की जान जोखिम में: मेंढ़ुका आंगनबाड़ी केन्द्र हादसा, GPM महिला बाल विकास विभाग कि घोर लापरवाही,

सुशासन सरकार के दावे फेल, मेंढ़ुका में छज्जा गिरा: अरविंद जायसवाल बोले- मासूमों को मौत के मुंह में बैठा रहा विभाग,

मेंढ़ुका में मौत का साया: बच्चों पर गिरा आंगनबाड़ी का छज्जा, BJP सरकार पर भड़के जनपद उपाध्यक्ष

कुंभकर्णी नींद कब टूटेगी? मेंढ़ुका आंगनबाड़ी में नौनिहालों का जान जोखिम में, विभाग की लापरवाही बेनकाब,

‘कई बार बताया, कोई सुनवाई नहीं’: मेंढ़ुका में बच्चों की जान से खेल, जर्जर छज्जा गिरने पर बवाल

सूरज यादव,गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के दूरस्थ आदिवासी गांव मेंढ़ुका में मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ का बड़ा मामला सामने आया है। यहां आंगनबाड़ी केंद्र का जर्जर छज्जा उस वक्त भरभराकर गिर गया जब अंदर दर्जनों नौनिहाल पढ़ाई कर रहे थे। गनीमत रही कि कोई मासूम इसकी चपेट में नहीं आया और सबकी जान बाल-बाल बच गई। लेकिन इस हादसे ने महिला एवं बाल विकास विभाग की घोर लापरवाही और नाकामी की कलई खोलकर रख दी है।

हादसे के बाद जनपद पंचायत मरवाही के उपाध्यक्ष अरविंद जायसवाल ने बीजेपी प्रदेश सरकार पर सीधा हमला बोला है। जायसवाल ने कहा कि रोज की तरह बच्चे केंद्र में पढ़ रहे थे, तभी अचानक छज्जा गिर गया और अफरा-तफरी मच गई। बच्चों को आनन-फानन में बाहर निकाला गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस जर्जर भवन की मरम्मत के लिए कई बार विभाग को लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। विभाग की इसी अनदेखी रवैया ने आज दर्जनों आदिवासी मासूमों की जान जोखिम में डाल दी।

GPM के दूरस्थ आदिवासी अंचल में बसे इस आंगनबाड़ी केंद्र की तस्वीरें सरकारी दावों की पोल खोल रही हैं। जहां एक तरफ नौनिहालों के भविष्य को संवारने की बातें होती हैं, वहीं हकीकत में उन्हें मौत के मुंह में बैठाया जा रहा है। ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। उनका सवाल सीधा है- अगर आज कोई बड़ा हादसा हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता? क्या विभाग सिर्फ कागजों पर ही बच्चों की सुरक्षा करता है?

इस घटना ने पूरे जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दूरस्थ अंचलों में बुनियादी सुविधाओं और भवनों की सुरक्षा को लेकर विभाग कितना गंभीर है, इसकी सच्चाई अब सामने आ चुकी है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस हादसे के बाद भी महिला-बाल विकास विभाग की कुंभकर्णी नींद टूटेगी, या फिर वह किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?

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