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बाढ़ राहत कार्य में तेजी लाएं सरकार व प्रशासन – रणधीर

बाढ़ राहत कार्य में तेजी लाएं सरकार व प्रशासन – रणधीर

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अंशु कुमार ठाकुर
सहरसा

कोशी बाढ़ पीड़ितों की जानकारी के लिए सीपीएम जिला सचिव रणधीर यादव के नेतृत्व में तीन बार गयी माकपा की टीम का रिपोर्ट –
दिनांक 28 सितंबर को कोशी बैरेज से साढ़े छः लाख से अधिक क्यूसेक पानी छोड़ने जाने के बाद जो तबाही व बर्बादी तटबंध के भीतर के जान माल को हुई वो भयावह दृश्य रोंगटे खड़ी करने वाली थी। 29 सितंबर को कोशी अपने भयंकर रोद्र रूप में तमाम चीजों को अपने आगोश में समाने को तैयार थी। आसमान छुती पानी की लहरें घर – द्वार, जीवा – जंत को अपनी तेज धारा के साथ बहाने लगी। हर तरफ चीख पुकार हाहाकार मचा हुआ था। मानव क्या पशु-पक्षी, जीवा- जंत भी जीवन रक्षा को व्याकुल थे। कोशी तटबंध के दोनों ओर पानी तटबंध के ऊपर से कई जगह भोभर फ्लो कर बांध को तोड़ते अपना नया ठिकाना खोज रही थी। सिर्फ तटबंध के अंदर ही नहीं बाहर के लोग भी कब कहां तटबंध क्रेक टूटेगा लेकर चिंतित थे। अन्ततः दरभंगा जमालपुर थाना के उत्तर भुभौल के पास आधी रात को कोशी अपना नया मुहाना बना ही लिया। दरभंगा जिला के किरतपुर एवं धनश्यामपुर प्रखंड के कई गांवों के साथ साथ सहरसा जिले के महिषी प्रखंड धोधेपुर पंचायत के धोधेपुर, पंचभींडा, शंकरथुआ , सोहरवा, बालूबाड़ी। तेलवा पश्चिमी पंचायत के समानी, पीपड़तांती, तीराघाट। बघवा पंचायत के गंडौल, रही टोल, एवं बीरगांव पंचायत के बहरामपुर आदि गांव को भी जलमग्न एवं तबाह कर ही दिया ।

कोशी के इस विकराल तांडव ने वीरपुर से कबीरपुर तक 120 किलोमीटर दूरी में बसे हजारों घरों एवं लाखों परिवारों को जीना दूभर कर दिया। कितने लोगों के घर द्वार माल मेवशी ही नहीं उनके भविष्य के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया। तटबंध टूटने के बाद जहां एक ओर नये इलाके के लोग तबाह व बर्बाद हो रहे हैं तो तटबंध के अंदर के लोग भी विस्थापित हो गये है। सारा कुछ पानी में बह गया। सिवाय माथा पीटने के अलावा कुछ बचा नहीं। हृदय विदारक कोशी का तांडव लोगों की नींद आज भी गायब किये हुआ है। बेघर हुए लोग नीचे पानी और ऊपर तपीश धूप, घर में खाने को कुछ नहीं, पीने को शुद्ध जल नहीं में ज़िन्दगी जीने को मजबूर है। ऐसी विषम परिस्थिति में सरकार एवं प्रशासन के लोग कछुए के चाल से राहत सामग्री लोगों के बीच ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन समान भेज रही है। सुखा अनाज एवं प्लास्टिक भी लोगों के नहीं के बराबर गया है। सामुदायिक किचन टांय फीस है।जो चिंता का विषय है। आज जरूरत है लोगों को पुनर्वासित कर जीने के तमाम संसाधनों को मुहैया कराने का तो सरकार कहती है सात हजार रुपए हर परिवार को राहत के रूप में देंगे। पता नहीं उसका भी क्या होगा कितने लोगों को मिलेगा या भ्रष्टाचार का भेंट चढ़ जाएगा। 1954 में कोशी बैरेज एवं 1965 तक कोशी तटबंध के निर्माण समय कोशी नदी को पानी झेलने की जो क्षमता थी उसमें कितनी कमी आयी है इस बात से पता चलता है कि शुरू में पन्द्रह से अठारह लाख क्यूसेक पानी भी नदी के लिए कुछ नहीं हुआ करता था आज छः लाख क्यूसेक पानी में ओभर फ्लो हो रहा है जबकि पुर्वी एवं पश्चिमी तटबंध को फीलहाल ऊंचा करते पक्की रोड भी बनाई गई है। प्रति वर्ष नेपाल की तराई से आने वाले गाद एवं मिट्टी बालू कोशी के भितरी हिस्सा को ऊंचा करते उनके क्षमता को कम करते जा रहा है। सरकार की कोई ठोस रणनीति नहीं है। कोशी के बराह क्षेत्र में हाई डैम का निर्माण कर कोशी के तांडव को रोकने की योजना पर आज तक कोई काम ही नहीं हुआ। सरकारी तंत्र और आला अधिकारी कोशी को चारागाह समझते है। हर बर्ष बाढ़ व बचाव कार्य के नाम पर करोड़ों रुपए का बंदरबांट होता रहता है। कोशी पीड़ित लोगों के लिए कोशी प्राधिकार कानून की भ्रूण हत्या कर दी गई।
सीपीएम की टीम सरकार एवं प्रशासन से मांग करती है कि युद्ध स्तर पर राहत बचाव कार्य चालू किया जाय।सुखा अनाज एवं प्लास्टिक सभी को तुरंत मुहैया कराई जाय। सामुदायिक किचन हर गांव में चलाया जाय। प्रति परिवार दो क्विंटल अनाज, दस हजार रुपए एवं पशु चारा की व्यवस्था किया जाय। पीने लायक शुद्ध पानी की व्यवस्था किया जाय। विस्थापितों को पुनर्वासित किया जाय। डाक्टरों की टीम व दवा हर गांव में भेजी जाय। बाढ़ पीड़ितों के ठहराव जगह जरनेटर की व्यवस्था रोशनी हेतु किया जाय। जान माल की क्षति मुआवजा दिया जाय। अगले फसल होने तक पीड़ित परिवारों को जीने लायक व्यवस्था किया जाय। रबी फसल हेतु खाद बीज कीटनाशक दवा आदि समय से उपलब्ध कराई जाय। अगर मांगों पर विचार नहीं किया गया तो पार्टी आन्दोलन पर उतारू होगी।
सीपीएम टीम के सदस्य – कामरेड रणधीर यादव, कामरेड शकील अहमद खां, मिथिलेश कुमार सिंह, युनूस भारती, राहुल कुमार, रेहान खान उर्फ रिंकू।
भवदीय
रणधीर यादव
जिला सचिव सीपीएम सहरसा।

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