शिक्षक के महत्व को समझना बड़ी बात: कृष्णा कुमार प्रजापति
विद्यालय विकास में भागीदारी
कैमूर। भभुआ प्रखंड के कोहारी पंचायत के डबढ़ियां गांव के रहने वाले कृष्णा कुमार प्रजापति ने शिक्षक के महत्व इस प्रकार बताया की जैसे की चार चांद लग गए हो। वे कहना चाहते हैं की सरकारी स्कूल पर अंगुली उठाने वाले लोग कभी सोचे है की सरकारी स्कूल में जाने वाले बच्चों के अभिभावक कभी बच्चे को स्कूल छोड़ने गए हो, कभी चिंता किए हैं की उनका बच्चा स्कूल जा रहा है या नही ? कभी समय का ध्यान रहा हो की बच्चा स्कूल लेट हो गया है ? कभी चिंता करते हैं कि बच्चे के पास कलम, काॅपी, किताब है भी या नहीं ? कभी चिंता करते हैं कि स्कूल का मिला गृह कार्य किया है या नहीं ? कभी चिंता करते हैं कि आज बच्चा कुछ सीखा है या नही ? कभी स्कूल में सिखाए गए कार्य को दोहराएं हैं ? जवाब होगा नही। लेकिन वही बच्चा प्राइवेट स्कूल में नामांकित होता है तो धारणाएं बदल जाती हैं। बच्चे से पहले उठाना, इसके नास्ते बस्ता, की चिंता शुरू कर देते हैं। समय से स्कूल पहुंचते हैं भले ही स्वयं अपने कार्य में लेट हो जाए। स्कूल से आते ही गृह कार्य बनवाने एवं याद करवाने में लग जाते हैं। उनके एक एक चीज की चिंता होने लगती है। जबकि यह सत्य है कि सरकारी विद्यालय में प्रशिक्षित शिक्षक टेट/सी टेट/ दक्षता उत्तीर्ण करके शिक्षा शास्त्र की जानकारी रखने वाले योग्य शिक्षक हैं। फिर भी अंगुली सरकारी शिक्षकों पर ही उठाएंगे। दुनिया में कोई है जो 4.97 पैसे में एक बच्चे को भोजन करा दे। एक दिन बारात में 200 लोगों के भोजन के लिए 3 महीने पहले से ही व्यवस्थाएं शुरू हो जाती है। लेकिन सरकारी विद्यालय में प्रति दिन 200 से 1000 बच्चों को पढ़ाने के अलावा भोजन भी कराया जाता है। ये कहीं संभव है ? सरकारी विद्यालय के आधे शिक्षक तो सरकार के लिए आंकड़े जुटाने में लगे रहते हैं। फिर भी सरकार गुणावक्तापूर्ण शिक्षा की बात करती है। और लक्ष्य तक नही पहुंचने या विरोध करने पर बलि का बकरा बना देती है। समाज को चिंतन करने की आवश्यकता है कि विद्यालय समाज के अंदर है या बाहर ? विद्यालय से लाभ की अपेक्षा रखने के साथ ही विद्यालय के विकास में भागीदारी बनाने की आवश्यकता है।
ब्यूरो चीफ, सत्यम कुमार उपाध्याय
7061837274
E-mail ID drsatyamkumarupadhyay@gmail.com
विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें।


















Leave a Reply