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प्रभारी मंत्री से मिलकर किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष ने किसानों के भूमि का उचित मुआवजा देने का किया मांग

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प्रभारी मंत्री से मिलकर किसान मोर्चा जिलाध्यक्ष ने किसानों के भूमि का उचित मुआवजा देने का किया मांग।

कैमूर। जिला अध्यक्ष किसान संघर्ष मोर्चा सह जिलाध्यक्ष भाजपा किसान मोर्चा कैमूर विमलेश पाण्डेय ने जिले के प्रभारी मंत्री एवं नगर विकास मंत्री नितिन नवीन से शनिवार को उनके आवास पर मुलाकात कर भारत माला परियोजना बनारस रांची टु कोलकाता एक्सप्रेस-वे निर्माण एवं एन एच 219 सड़क चौड़ीकरण एवं बाई पास निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में किसानों के भूमि का उचित मुआवजा देने का मांग किया। वही अपने लिखित मांग पत्र में जिलाध्यक्ष ने कैमूर जिले के किसानों के साथ हो रहे अन्याय का उल्लेख भी किया है। मांग पत्र मे सरकार पर किसानों के द्वारा पिछले दो सालों से लगातार आंदोलन की अनदेखी करने का आरोप लगाया। भूमि विवाद एवं कम मुआवजा की समस्याओं को दूर करने के लिए किसानों की मांग पर जिला में आर्बिटेटर बहाल करने के वादे से सरकार पिछे हट रही है। उन्होंने प्रभारी मंत्री से आग्रह किया इस जटिल मामले को गंभीरता से लेते हुए उचित पहल करें। किसानों के भूमि अधिग्रहण में 2013 सर्किल रेट पर मुआवजा दिया जा रहा है। जो बाजार मूल्य से बहुत ही कम है। किसान सड़क निर्माण का विरोध नहीं कर रहे हैं बल्कि उचित मुआवजा की मांग कर रहे हैं। उन्होंने ने प्रभारी मंत्री से कहा उस समय एम एल सी संतोष कुमार सिंह के द्वारा विधान परिषद में उठाए गए सवाल पर मुआवजा एवं सही प्रकृति निर्धारण के लिए तीन महीने के अंदर विधानसभा समिति गठित करने की मांग को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैया से कैमूर के किसानों में आक्रोश है। वही कैमूर जिले में किसानों की भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा एवं सही प्रकृति निर्धारण की मांग नहीं पुरी की गई तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। किसान संघर्ष मोर्चा कैमूर के प्रतिनिधि मंडल मे अमित रंजन सिंह, विकी सिंह शामिल थे। वहीं प्रतिनिधि मंडल ने उचित मुआवजा एवं सही प्रकृति निर्धारण के लिए सभापति अवधेश सिंह को भी ज्ञापन सौंपा। कैमूर जिले में कुल 93 मौजा के सैकड़ों किसानों का 2 हजार एकड़ से अधिक भूमि अधिग्रहण की गई है। भूमि अधिग्रहण करते समय अधिकारियों के द्वारा भूमि की प्रकृति निर्धारण में गड़बड़ी करते हुए बाजार मूल्य से बहुत कम मुआवजा दिया जा रहा है। उचित मुआवजा एवं सही प्रकृति निर्धारण को लेकर किसान पिछले दो सालों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। बिहार सरकार के द्वारा किसानों के आंदोलन की अनदेखी करने पर किसानों में जबरदस्त गुस्सा है। बिना उचित मुआवजा दिए सड़क निर्माण का प्रयास बिहार सरकार एवं एन एच ए आई के द्वारा शुरू किया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

ब्यूरो चीफ, सत्यम कुमार उपाध्याय
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