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फोंडा-मौत हो रही थी तो बरतन बजाने को कहाँ, अब क्या घंटा हिलाने का जनता का? सवाल

मौत हो रही थी तो बरतन बजाने को कहाँ, अब क्या घंटा हिलाने का जनता का? सवाल

फोंडा ( प्रतिनिधी )पुरे भारत मे जो हालत पिछले दस सालो मे हुयी है, वैसी हालत कभी लोगो ने देखी नही थी |कोरोना से लोग मर रहे थे तब दिया जलाना और बर्तन बजाना कहंकर लोगो का मजाक बनाया था |दवा के नाम पर कारोबार करके करोडो रुपये अपनी तिजोरी मे डालने वाले दलाल देश मे महंगाई, बेरोजगारी बढाते रहे |इससे उनका पेट नही भरा, तो विपक्ष के नेताओ को जेल मे डालके भारतीय संविधान खतम करने की कोशीश की गयी |तब भारत देश बचाने के लिये इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी रास्तेपर आ गये थे |उनका साथ जनता ने दिया है |लोकसभा चुनाव मे लोगोने भाजपा को ना करदी है |फिर भी पद का दुरूपयोग करते हुऐ, चुनाव अफसरो को धमकाकर भाजपा सीट दिखाऐ गये है |फिर से भाजपा सरकार बनी तो देश की नैया डुबंना तय है |जो लोग देश के लोगो को डुबाके चार पाच बिझनेसमेन का मुनाफा कर रहे थे, वह वापस सत्ता मे बैठ गये, तो लोगो को अब घंटा हिलाना पडेगा, ऐसा लोग कहं रहे है |हर जगह यही चर्चा रंगती दिख रही है |अबी सिर्फ भगवान देश और देशको बचा सकते है |क्योकी बंदर के हात मे लगाम गया, तो आजतक किसी का बला नही, हुआ है |

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