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सत्य से भागती मीडिया और झूठ परस्ती पत्रकारिता: आम नागरिकों को ‘जनहित की पत्रकारिता’ बताने का प्रयास

सत्य से भागती मीडिया और झूठ परस्ती पत्रकारिता: आम नागरिकों को ‘जनहित की पत्रकारिता’ बताने का प्रयास

*रायपुर, 19 अप्रैल 2026*
स्वतंत्र लेखक एवं सामाजिक टिप्पणीकार हरिशंकर पाराशर ने वर्तमान मीडिया की भूमिका पर तीखा प्रहार करते हुए कहा है कि आज की पत्रकारिता सत्य से भाग रही है और झूठ की परस्ती कर रही है, फिर भी वह आम नागरिकों को लगातार ‘जनहित की पत्रकारिता’ बताने का प्रयास कर रही है।

श्री पाराशर ने अपने लेख में कहा, “मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माना जाता है, लेकिन हकीकत यह है कि यह स्तंभ अब सत्य के बजाय झूठ की दीवार बन चुका है। जो मीडिया सत्य से भागती है और झूठ की पूजा करती है, वही आम आदमी को यह समझाने की कोशिश में लगी है कि वह जनता के हित में काम कर रही है। यह सबसे बड़ा धोखा है जो वर्तमान पत्रकारिता आम नागरिकों पर थोप रही है।”

उन्होंने आगे लिखा कि आज की अधिकांश मीडिया संस्थाएं कॉर्पोरेट घरानों, राजनीतिक दलों और TRP के चंगुल में पूरी तरह जकड़ी हुई हैं। वे अब खबर नहीं, बल्कि सनसनीखेज ‘कंटेंट’ बेच रही हैं। फेक न्यूज, आरोप-प्रत्यारोप, विवाद और क्लिक-बाइट ही उनके मुख्य उत्पाद बन गए हैं। जब कोई महत्वपूर्ण मुद्दा सामने आता है तो सत्य को उजागर करने के बजाय उसे चुनिंदा कोण से पेश किया जाता है। जो तथ्य मीडिया के मालिकों या नियंत्रक शक्तियों के खिलाफ जाते हैं, उन्हें दबा दिया जाता है या पूरी तरह अनदेखा कर दिया जाता है।

श्री पाराशर ने आम नागरिकों से अपील की कि वे टीवी स्क्रीन पर चिल्लाते एंकरों, सोशल मीडिया पर वायरल झूठे वीडियो और अखबारों में छपे प्रायोजित लेखों से सावधान रहें। उन्होंने कहा, “ये सब एक ही कहानी दोहराते हैं कि ‘हम आपके हित में लड़ रहे हैं’, लेकिन असलियत यह है कि वे केवल अपने हित साध रहे हैं। ट्रेडिंग, रेटिंग, क्लिक-बाइट, राजनीतिक संरक्षण और कॉर्पोरेट फंडिंग ही उनकी असली प्राथमिकता है। जनहित सिर्फ एक नारा है, जिसे वे बार-बार दोहराते हैं ताकि आम आदमी भ्रम में बना रहे।”

लेखक ने वर्तमान पत्रकारिता के सबसे खतरनाक पहलू की ओर इशारा करते हुए कहा कि अब सत्य को ‘राय’ बना दिया गया है। एक ही घटना पर अलग-अलग चैनल पूरी तरह विपरीत कहानियां चला रहे होते हैं और दोनों पक्ष दावा करते हैं कि वे सच्चाई बता रहे हैं। परिणामस्वरूप आम नागरिक भ्रमित, गुस्सैल और विभाजित हो जाता है। यही मीडिया की रणनीति है – जनता को जागरूक बनाने के बजाय उसे बांटकर रखना।

श्री हर हरिशंकर पाराशर ने कहा कि जिस पत्रकारिता को निडर, निष्पक्ष और सत्य की रक्षा करने वाली होनी चाहिए, वह आज डरपोक, पक्षपाती और झूठ की दलाली कर रही है। जो पत्रकार साहस दिखाकर सच्चाई उजागर करते हैं, उन्हें ट्रोल किया जाता है, एंटी-नेशनल बताया जाता है या चुप करा दिया जाता है। जबकि बाकी लोग माइक थामकर “देश और जनता के हित में” का नाटक करते रहते हैं।

अंत में लेखक ने आम नागरिकों से आह्वान किया कि वे अब इस खेल को समझें और मीडिया की ‘जनहित’ वाली कहानी पर अंधा विश्वास न करें। उन्होंने सवाल पूछने की सलाह दी:

– यह खबर किसके हित में है?
– इसका स्रोत क्या है?
– पूरा सत्य क्यों छुपाया जा रहा है?

श्री पाराशर ने जोर देकर कहा, “सच्ची पत्रकारिता वह है जो सत्य को उजागर करती है, चाहे वह किसी को कितना भी महंगा पड़ जाए। जो मीडिया सत्य से भागती है और झूठ को जनहित का चोला पहनाती है, वह न तो पत्रकारिता है और न ही जनहित में है। वह तो सिर्फ झूठ का व्यापार है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आम नागरिकों ने खुद को इस धोखे से नहीं बचाया तो एक दिन असली सत्य हमेशा के लिए दब जाएगा।

* हरिशंकर पाराशर*
(स्वतंत्र लेखक एवं सामाजिक टिप्पणीकार)

*रिपोर्ट: विशेष संवाददाता*

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