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युग ऋषि श्री राम शर्मा आचार्य की प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन प्रज्ञा पीठ गायत्री मंदिर स्वर्णकार कॉलोनी विदिशा में हुआ संपन्न

युग ऋषि श्री राम शर्मा आचार्य की प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन प्रज्ञा पीठ गायत्री मंदिर स्वर्णकार कॉलोनी विदिशा में हुआ संपन्न


सर्वप्रथम कथा प्रारंभ होने के पूर्व पूजा, अर्चन , वंदन के साथ दीप प्रज्वलन राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी लायन अरुण कुमार सोनी एवं अन्य उपस्थित जनों द्वारा किया गया। सभी का तिलक लगाकर स्वागत किया गया एवं सभी ने अपना स्थान ग्रहण किया।

लायंस इंटरनेशनल क्लब पूर्व अध्यक्ष एवं डिस्ट्रिक्ट सह मल्टीमीडिया प्रभारी लायन अरुण कुमार सोनी ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म के प्रचार प्रसार की बात कही। उन्होंने कहा कि ज्ञान की बात तो कथावाचक जी कहेंगे लेकिन आप जो भी धार्मिक, आध्यात्मिक आयोजन करें तो उसके प्रचार प्रसार के हेतु मुझे अवश्य आमंत्रित करें मैं सदैव आपकी सेवा में उपस्थित रहूंगा। आपने कहा की सनातन धर्म का प्रचार-प्रसार अति आवश्यक है जिसमें हम सभी को अपनी सहभागिता निभाई चाहिए।

प्रज्ञा पीठ समन्वयक ,गायत्री परिवार के लिए समर्पित, ज्ञान से परिपूर्ण मुकेश श्रीवास्तव जी के द्वारा कथा प्रारंभ के पूर्व उनके ही बालक उन्हीं की तरह समर्पित ने गायन एवं हारमोनियम के साथ भजन प्रस्तुत किया। तत्पश्चात मुकेश श्रीवास्तव जी ने बताया कि प्रज्ञा पुराण कथा, युग-ऋषि श्री राम शर्मा आचार्य द्वारा रचित एक आधुनिक पुराण है, जो रामायण और गीता के समान प्रेरणादायक है। जिसमें समकालीन समस्याओं के समाधान और मानव में देवत्व जगाने के लिए कथाओं के माध्यम से मार्गदर्शन दिया गया है। जिसका उद्देश्य व्यक्ति, परिवार और समाज का निर्माण करना है। यह कथाएं केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने और विवेक व प्रज्ञा को विकसित करने के लिए हैं। जो गायत्री परिवार द्वारा जन-जागरण के लिए उपयोग की जाती हैं। आपने कहा कि इसका मुख्य
उद्देश्य: व्यक्ति, परिवार और समाज में देवत्व का संचार करना, धरती पर स्वर्ग का अवतरण, स्वस्थ मन-शरीर और सभ्य समाज का निर्माण करना है।

आपने इसका महत्व बताते हुए कहा कि प्रज्ञा पुराण आधुनिक युग की समस्याओं पर आधारित, नैतिक मूल्यों और विवेकपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं। यह कथाएं मनुष्य को अपनी आंतरिक शक्तियों को जगाने, अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने और जीवन के द्वंद्वों (सुख-दुख, पाप-पुण्य) को समझने में मदद करती हैं।
कथा समापन के पश्चात आरती आरती हुई सभी ने सामूहिक आरती की। इसके बाद प्रसादी वितरण हुआ। अंत में कथा आयोजक द्वारा सभी का आभार व्यक्त किया गया।

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