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 व्यक्ति के जीवन में सत्संग के बिना विवेक नहीं आता है और सत्संग राम जी व ठाकुर जी की कृपा से ही हो सकता है

जिला संवाददाता राजेश पोरवाल रतलाम

 व्यक्ति के जीवन में सत्संग के बिना विवेक नहीं आता है और सत्संग राम जी व ठाकुर जी की कृपा से ही हो सकता है

उनकी कृपा के बिना कुछ भी संभव नहीं है यह बात श्री कालिका माता सत्संग हॉल में रत्नावत परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान कथा वाचिका देवप्रिय माही किशोरी ( श्री धाम वृंदावन )
ने कही उन्होंने कहा कि ठाकुर जी जिसकी बांह पकड़ लेते हैं तो जिंदगी भर छोड़ते नही हैं उन्होंने कहा कि वर्तमान कलयुग में भगवान के नाम का संकीर्तन करने से पुण्य का फल प्राप्त होता है यदि आप मन में पुण्य की भावना भी ले आए तो भी आपका कल्याण होना निश्चित् क्योंकि अच्छे विचार भी व्यक्ति का कल्याण कर सकते हैं तथा उसके मन को पवित्र कर सकते हैं यही कलयुग का फायदा है उन्होंने कहा कि वर्तमान कलयुग में कोई व्यक्ति किसी के दुख से दुखी नहीं है वह उल्टा किसी के दुख से खुश होता है इसलिए हमें भगवान पर विश्वास करना चाहिए क्योंकि भगवान ही दुख के समय दुख से लड़ने का बल व प्रेरणा देते हैं उन्होंने कहा कि व्यक्ति को किसी भी पवित्र जलाशय के सामने प्रभु के नाम का स्मरण करना चाहिए या वैदिक श्लोक अथवा मंत्र का जाप करना चाहिए इससे पुण्य प्राप्त होता है ।

उन्होंने कहा कि इस संसार में कोई भी ऐसा व्यक्ति नहीं है जो दुखी नहीं है कोई तन से कोई मन से कोई धन से दुखी है संसार में वही व्यक्ति सुखी है इसके जीवन में संतोष है, गृहस्थ आश्रम में जो पति-पत्नी सत्संग करते हैं जिनके यहां प्रतिदिन भगवान की पूजा अर्चना होती है सात्विक भोजन बनता हो व उसका भोग ठाकुर जो को लगता हो तो उनका गृहस्थ आश्रम धन्य होता है। राकेश पोरवाल ने बताया कि कथा के दौरान श्याम प्यारे कुंज बिहारी जय जय श्री हरि राजदुलारी ..भजन पर महिलाएं जमकर थिरकी। कथा के प्रारंभ में मुख्य जजमान हरीशचंद्र, मधुबाला, शशांक, चहेती ने पोथी पूजन किया अंत में आरती कर प्रसादी वितरित की गई। इस अवसर पर दीपक पुरोहित, मधु घरिया, वंदना मजावदिया, सुधीर गुप्ता सहित अनेकों नागरिक मौजूद थे।

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