Advertisement

मांडलगढ में गरीब महिला के घर पर चला बुल्डोजर_ घर से राशन का सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया

सत्यार्थ न्यूज़ भीलवाड़ा

अब्दुल सलाम रंगरेज

मांडलगढ में गरीब महिला के घर पर चला बुल्डोजर_ घर से राशन का सामान निकालने तक का मौका नहीं दिया

भीलवाड़ा

जिले के मांडलगढ़ में कंजर कॉलोनी में अवैध रूप से बस रही कॉलोनी में गुरुवार को नगर पालिका एवं पुलिस प्रशासन की मौजूदगी में पीला पंजा चला।
मांडलगढ़ थाना प्रभारी आईपीएस प्रोबेशनर जतिन जैन ने बताया कि मांडलगढ़ की कंजर बस्ती में लोगों ने अवैध रूप से कब्जा कर झोंपडिय़ां बना ली थी। उन्होंने बताया कि इसे लेकर नगर पालिका ने पूर्व में नोटिस भी जारी किये थे। लेकिन अतिक्रमी नहीं हटे।
गुरुवार को पुलिस जाब्ते की मौजूदगी में नगर पालिका की टीम मय दल-बल के मौके पर पहुंची और अतिक्रमणों पर पीला पंजा चलाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया।

इस कारवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अवैध अतिक्रमण के साथ साथ एक महिला के वैध मकान पर भी बुल्डोजर चला जमीदोंज कर दिया गया। उक्त मकान प्रार्थिया द्वारा समरतिया कंजर के वारिसान से 2013 में खरीदा गया जिसकी रजिस्ट्री भी उप पंजीयक कार्यालय मांडलगढ द्वारा की गई। उक्त पट्टा व रजिस्ट्री होने के बावजूद भी मकान तोड दिया जाना प्रशासनिक अधिकारियों का तानाशाही रवैया दर्शाता है जिन पर कहीं ना कहीं सत्ता का हाथ है। पीड़ित प्रार्थिया को किसी भी प्रकार कोई भी अतिक्रमण संबंधित नोटिस प्रशासन द्वारा नहीं दिया गया और ना ही पीड़िता को अपना पक्ष रखने दिया गया और प्रशासन ने एक नहीं सुनी।

प्रशासन की निर्दयता तब सामने आयी जब पीड़ित परिवार को घर से सामान निकालने का मौका तक नहीं दिया गया और कारवाई के दौरान राशन का सामन, घरेलू सामान,बेड, फ्रिज, कुलर गेहूं से भरी कोठियां, मोटरसाइकिल, छोटी सी किराणे कि दुकान, रोजमर्रा के सामान सभी मलबे में दबा दिए गए। प्रशासन की इस निर्दयतापूर्ण कार्यवाही से पुरा परिवार सदमे मे है और बार बार अपने साथ हुई अन्याय पूर्ण कार्यवाही के खिलाफ अपने आसुंओं को रोक नहीं पा रहा है। यह कारवाई संवैधानिक लोकतंत्र में तानाशाही व बेलगाम प्रशासनिक अधिकारीयों की हठधर्मिता प्रदशित कर रही है जिन्हें न्यायालय का कोई खौफ नहीं है जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिना पीड़ित के पक्ष जाने असंवैधानिक बुल्डोजर कारवाई पर रोक लगाई हुई है। प्रशासनिक अधिकारी अपने आप को सुप्रीम कोर्ट से ऊपर समझते हुए संवैधानिक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की धज्जियां उड़ा रहे है। इस कारवाई के दौरान प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस के उच्च अधिकारी भी मौजूद थे।

मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट मोहम्मद इमरान रंगरेज ने पीड़िता से मुलाकात कर उनकी व्यथा सुनी। एसडीपीआई के कार्यकर्ता भी पहुंच कर मामले की जानकारी ली। उन्होने बताया कि इन्होंने अपना असंवैधानिक और तानाशाही रवैया अपनाया ।लेकिन इन अधिकारियों को कोर्ट में जवाब देना होगा और इनके वेतन से ही पिडित परिवार के लिए मुआवजा वसुल किया जाएगा।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!