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आजादी के 77 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे भोखरा के ग्रामीण।

आजादी के 77 साल बाद भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे भोखरा के ग्रामीण।

जिप सदस्य ने ग्रामीणों के बीच पहुंचकर जाना ग्रामीणों का हाल।

ग्रामीणों ने जिप सदस्य को बताया की विकास की धारा सिर्फ कागजों में बहाती परन्तु धरातल पर स्थिति आज भी आदिम युग वाली है।

ब्यूरो चीफ, सत्यम कुमार उपाध्याय

कैमूर। आजादी के सात दशक ( 77 वर्ष ) बाद भी भोखरा में मूलभूत सुविधायें नदारद रहने से ग्रामीण आज भी नारकीय जीवन जीने के लिए विवश हैं। सरकारें आती गयी विकास का धारा कागजों में बहाती गई परन्तु धरातल पर स्थिति आज भी आदिम युग वाली है। भभुआ प्रखंड के भोखरा में सुविधाओं का आज भी टोटा नजर आ रहा है। इस गांव में ग्रामीणों को न तो पीने के लिए शुद्ध पानी है और ना ही पक्की सड़क है। शुद्ध पेय जल के नाम पर मुसहर बस्ती में लगा एक सरकारी चापाकल है। जहां पर पानी के लिए हर समय भीड़ लगी रहती है। बिगड़ने की स्थिति में कुआं व तालाब का सहारा है। इस गांव का दुर्भाग्य कहे या शासन प्रशासन की लापरवाही। लेकिन यह सच है कि आजादी के 77 वर्ष बाद भी इस गांव में ग्रामीण मूलभूत सुविधा,यातायात,पेयजल किल्लत स्वास्थ्य ,गंदगी आदि से परेशान हैं। यहां के ग्रामीण बिगड़ा में जीवन जी रहे हैं।

महिलाएं काली मां पूजन करने के लिए बरसात के दिनों में कीचड़ सने रास्ते से होकर जाती हैं। बस्ती वाले कहते हैं की गजब यह है कि सरकार अनुसूचित जाति /जनजाति के लोगों के लिए विकास के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन आज भी गांव में यदि कोई बीमार होता है तो उसे ग्रामीण अपनी पीठ या चारपाई पर ढोने को मजबूर हैं। गांव के पास कोई भी अस्पताल नहीं है। इस गांव की घरों की बात करें तो यहां पर करीब एक सौ घरों की बस्ती है जिसमें 70% मुसहर जाति ,20% बिंद जाति व 10 % अन्य समुदाय के लोग वास करते हैं। 20 से अधिक मकान कच्चे का देखे जा सकते हैं जो सरकार की आवास योजना का पोल खोलता है। ग्रामीण सागर बिंद ,रामजी मुसहर ,रुक्मिणा देवी व नंदू मुसहर ने बताया कि उनके गांव के लोग आजादी के 77 साल बाद भी नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। सरकार की नलजल योजना का भी लाभ इस गांव को नही मिला है। मुसहर बस्ती में एक चापाकल है जो बस्ती के लोगों का प्यास बुझाने का सहारा है। खराबी की स्थिति में लोग गंदे पानी को पीने को मजबूर रहते हैं। गांव के मुख्य मार्ग में गाजर बिंद के घर से भोला के घर तक कच्ची कीचड़ सने रास्ते से लोगों को गुजरना पड़ता है। इस गांव की बदतर स्थिति को जानकर भभुआ के जिला परिषद सदस्य ने रविवार को उक्त गांव का दौरा किया। जहां चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्या को जाना और स्थिति का जायजा लिया। ग्रामीणों के हालात को देखकर चौपाल में ही जिप सदस्य ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि बहुत जल्द ही मैं अपने जिला परिषद फंड से पक्की सड़क का निर्माण करवाऊंगा। जिप सदस्य के भरोसे से ग्रामीणों में खुशी दिखी।

ब्यूरो चीफ, सत्यम कुमार उपाध्याय
7061837274
E-mail ID drsatyamkumarupadhyay@gmail.com
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