घोरावल विकास खंड में स्वयं सहायता समूहों की जागरूकता संगोष्ठी
नए रोजगार सृजन एवं मार्केट लिंकेज पर रहा विशेष फोकस
घोरावल (सोनभद्र) सत्यनारायण मौर्य/संतेश्वर सिंह

घोरावल विकास खंड में स्वयं सहायता समूहों के सशक्तिकरण को लेकर एक जागरूकता संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को नए रोजगार सृजन, स्वरोजगार, बैंक लिंकेज एवं मार्केट कनेक्टिविटी के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में ई. प्रकाश पाण्डेय, संस्थापक – तेजस्वी किसान मार्ट ने मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता करते हुए स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं से स्वावलंबी बनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि तेजस्वी किसान मार्ट के माध्यम से समूहों को प्रशिक्षण, प्रबंधन, उत्पाद विकास, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं मार्केट लिंकेज सहित हर प्रकार का सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे समूह अपने उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुँचा सकें।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि मानकर्णिका देवी, जिला उपाध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी रहीं। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम हैं और सरकार की योजनाओं से जुड़कर महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं।
विशिष्ट अतिथि के रूप में संतोष कुमार सिंह, कॉपरेटिव बैंक मीरजापुर के निदेशक व जिलामंत्री, भाजपा किसान मोर्चा उपस्थित रहे। उन्होंने कृषि एवं ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में स्वयं सहायता समूहों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। इस अवसर पर समूहों को बैंकिंग सुविधाओं, ऋण प्रबंधन एवं वित्तीय अनुशासन की जानकारी दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता महेंद्र सिंह, एडीओ (आई.एस.बी.) घोरावल द्वारा की गई। अपने अध्यक्षीय संबोधन में उन्होंने कहा कि तेजस्वी किसान मार्ट के साथ समन्वय स्थापित कर प्रत्येक क्लस्टर स्तर पर स्टोर प्रारंभ किए जाएंगे, जिससे स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय एवं प्रादेशिक स्तर पर स्थायी मार्केट लिंकेज मिल सके। उन्होंने इसे ग्रामीण क्षेत्र में नए रोजगार सृजन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
कार्यक्रम का संचालन शिवकुमार, बी.एम.एम. (ब्लॉक मिशन मैनेजर) द्वारा किया गया।
संगोष्ठी में शहंशाह आलम, दुर्गा, देवी, चंद्रप्रभा देवी, किरण देवी, मीना पाल, सबीना सहित अनेक स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने सक्रिय सहभागिता की और अपने अनुभव साझा किए।
कार्यक्रम के अंत में महिलाओं ने संकल्प लिया कि वे नए उद्यमों की शुरुआत कर स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाएंगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने में योगदान देंगी।
















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