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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : कैसे करें सरल पूजन और जन्माष्टमी पर कैसे करें समस्या का निवारण, जानिए 9 अचूक मंत्र।

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी : कैसे करें सरल पूजन और जन्माष्टमी पर कैसे करें समस्या का निवारण, जानिए 9 अचूक मंत्र।

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भगवान श्रीकृष्ण का जन्म अष्टमी तिथि, रोहिणी नक्षत्र, वृषभ राशि, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी, बुधवार, रोहिणी नक्षत्र एवं वृष के चन्द्रमाकालीन अर्धरात्रि के समय हुआ था।

ऋषियों के मतानुसार सप्तमी युक्त अष्टमी ही व्रत, पूजन आदि हेतु ग्रहण करनी चाहिए। वैष्णव संप्रदाय के अधिकांश लोग उदयकालिक नवमी युत श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को ग्रहण करते हैं।भगवान श्रीकृष्ण का जन्मदिन बडे़ ही धूमधाम से मनाया जाता है।इस दिन व्रत करनेवाले को चाहिए कि उपवास के पहले दिन कम भोजन करें। रात्रि में ब्रह्मचर्य का पालन करें।व्रत के दिन स्नानादि नित्यकर्म करके सूर्यादि सभी देव दिशाओं को नमस्कार करके पूर्व या उत्तर मुख बैठें।

भगवान श्रीकृष्‍ण को वैजयंती के पुष्प अधिक प्रिय है, अतः जहां तक बन पडे़ वैजयंती के पुष्प अर्पित करें और पंचगंध लेकर व्रत का संकल्प करें।

कृष्णजी की मूर्ति को गंगा जल से स्नान कराएं। फिर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद, केसर के घोल से स्नान कराकर फिर शुद्ध जल से स्नान कराएं। फिर सुन्दर वस्त्र पहनाएं। रात्रि बारह बजे भोग लगाकर पूजन करें व फिर श्रीकृष्णजी की आरती उतारें।

उसके बाद प्रसाद ग्रहण करें। व्रती दूसरे दिन नवमी में व्रत का पारणा करें।

9 अचूक मंत्र===============

 (1) दारिद्रय निवारण के लिए- 

’श्री हरये नम:’ का यथाशक्ति जप करें तथा श्रीकृष्ण भगवान के विग्रह का पंचोपचार पूजन कर पंचामृत का नेवैद्य लगाएं।

(2) दैन्य नाश व सुख-शांति के लिए- 

‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का जप करें। श्रीकृष्ण भगवान के विग्रह का पंचामृत से अभिषेक कर मेवे का नेवैद्य लगाएं। यह मंत्र कल्पतरु है।

(3) विपत्ति-आपत्ति से बचने के लिए- 

‘श्रीकृष्ण शरणं मम्’ का जप करें।

(4) शांति तथा मोक्ष प्राप्ति के लिए- ‘

ॐ क्लीं हृषिकेशाय नम:’ का जप करें।

(5) विवाहादि के लिए- 

‘श्री गोपीजन वल्लभाय स्वाहा’ का जप करें तथा राधाकृष्ण के‍ विग्रह का पूजन करें।

(6) घर में सुख-शांति के लिए- 

‘ॐ नमो भगवते रुक्मिणी वल्लभाय स्वाहा’ का जप करें तथा कृष्ण-रुक्मणी का चित्र सामने रखें।

(7) संतान प्राप्ति के लिए

निम्न मंत्र की 1 माला नित्य करें। निश्चित ही संतान प्राप्ति होती है तथा उच्चारण का विशेष ध्यान रखें।

‘ॐ देवकीसुत गोविन्द वासुदेव जगत्पते।

देहि में तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गत:।।’ 

(8) धन-संपत्ति के लिए- 

‘ॐ श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम:’। श्री लक्ष्मी-विष्णु की प्रतिमा रखकर पंचोपचार पूजन कर जपें

 (9) शत्रु शांति के लिए – 

भगवान नृ‍सिंह की सेवा अत्यंत लाभदायक है। निम्न मंत्र की एक माला नित्य करने से शत्रु शांति, टोने-टोटके, भूत-प्रेत आदि से बचाव होता है-

ॐ उग्र वीरं महाविष्णुं ज्वलंतं सर्वतोमुखम्।

नृ‍सिंह भीषणं भद्रं, मृत्युं-मृत्युं नमाम्यहम्।।’ 

उपरोल्लिखित मंत्रों में पूजन में तुलसी का प्रयोग अवश्य करें। पूर्वाभिमुख होकर। कुशासन तथा श्वेत वस्त्र का उपयोग करें।

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