शिव ताण्डव स्तोत्र: बच्चों के लिए महादेव की शक्ति और रावण की भक्ति की अनोखी कहानी
लेखिका: मोनिका गुप्ता

आज के इस आधुनिक युग में जहाँ हम अपने बच्चों को दुनिया भर की जानकारी दे रहे हैं, वहीं अपनी सांस्कृतिक जड़ों और संस्कारों (Sanskaar) से जोड़ना भी उतना ही अनिवार्य है। सनातन संस्कार विधा गुरुकुलम का उद्देश्य ही यही है कि हम जटिल शास्त्रों को इतना सरल बना दें कि एक नन्हा बालक भी उसे समझ सके।
आज हम चर्चा करेंगे दुनिया के सबसे शक्तिशाली स्तोत्रों में से एक— ‘शिव ताण्डव स्तोत्र’ की। विशेषकर इसके पहले श्लोक की, जो हमें महादेव के एक अद्भुत स्वरूप के दर्शन कराता है।
1. शिव ताण्डव स्तोत्र का परिचय (Introduction)
शिव ताण्डव स्तोत्र कोई साधारण कविता नहीं है। यह शब्दों का एक ऐसा ताना-बाना है जो मन में जोश और शरीर में ऊर्जा भर देता है। इसकी रचना लंकाधिपति रावण ने की थी। रावण, जो भले ही अपने अहंकार के लिए जाना जाता था, लेकिन वह भगवान शिव का परम भक्त और महान विद्वान भी था।
जब हम इस स्तोत्र को सुनते हैं, तो डमरू की थाप और शब्दों की लय हमें एक अलग ही दुनिया में ले जाती है। बच्चों के लिए इसे सीखना उनकी ‘Pronunciation’ (उच्चारण) और ‘Memory’ (याददाश्त) को तेज करने का एक बेहतरीन तरीका है।
2. पहला श्लोक: शब्द और उनका सरल अर्थ
आइये, सबसे पहले उस श्लोक को देखते हैं जिसे सुनकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं:
> जटाटवीगलज्जल प्रवाहपावितस्थले
> गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।
> डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
> चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम्॥
>
बच्चों के लिए आसान शब्द-अर्थ (Vocabulary)
अभिभावक अपने बच्चों को ये शब्द खेल-खेल में सिखा सकते हैं:
* जटा (Jata): शिव जी के लंबे और घने बाल।
* अटवी (Atavi): इसका अर्थ होता है ‘जंगल’। शिव जी की जटाएं इतनी घनी हैं जैसे कोई गहरा जंगल हो।
* गलज्जल (Galaj-jala): बहता हुआ जल (माँ गंगा)।
* भुजङ्ग (Bhujang): सांप या नाग।
* मालिका (Malika): माला।
* डमत् (Damat): डमरू से निकलने वाली आवाज़।
* चण्ड ताण्डव (Chanda Tandav): महादेव का वह नृत्य जो बहुत तेज और शक्तिशाली है।
* शिवम् (Shivam): कल्याण या सबका भला।
3. श्लोक का भावार्थ: महादेव का स्वरूप
इस श्लोक में रावण भगवान शिव की सुंदरता और शक्ति का वर्णन कर रहा है। वह कहता है:
“महादेव के सिर पर जटाओं का एक घना जंगल है। उन जटाओं से मां गंगा की पवित्र धारा बह रही है, जिससे वह स्थान अत्यंत पावन हो गया है। उनके गले में बड़े-बड़े सांपों की एक सुंदर माला लटक रही है। शिव जी अपने हाथ में पकड़े डमरू को ‘डम-डम’ की आवाज के साथ बजा रहे हैं और एक बहुत ही शक्तिशाली ‘ताण्डव’ नृत्य कर रहे हैं। ऐसे दिव्य स्वरूप वाले शिव जी हम सबका कल्याण करें।”
4. शिव पुराण की कहानी: जब रावण का अहंकार टूटा
बच्चों, हर मंत्र के पीछे एक कहानी होती है। इस स्तोत्र के जन्म की कहानी बहुत दिलचस्प है।
अहंकारी रावण और कैलाश पर्वत:
एक बार रावण को अपनी ताकत पर बहुत घमंड हो गया। उसने सोचा कि वह लंका से बार-बार कैलाश पर्वत पर महादेव के दर्शन करने आता है, क्यों न वह पूरे कैलाश पर्वत को ही उठाकर लंका ले जाए!
जब रावण ने कैलाश पर्वत को उठाना शुरू किया, तो पर्वत हिलने लगा। पर्वत पर रहने वाले सभी जीव-जंतु और स्वयं माता पार्वती भी विचलित हो गईं। लेकिन महादेव तो सब जानते थे। उन्होंने मुस्कुराते हुए अपने पैर के अंगूठे (Toe) से पर्वत को हल्का सा दबा दिया।
पर्वत के नीचे रावण का हाथ दब गया। दर्द के मारे रावण चिल्लाने लगा, लेकिन उसे अपनी गलती का एहसास हुआ। उसने महसूस किया कि महादेव के सामने उसका अहंकार कुछ भी नहीं है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उसने उसी क्षण अपनी बुद्धि और संगीत का उपयोग किया और ‘शिव ताण्डव स्तोत्र’ गाना शुरू किया। महादेव उसकी स्तुति से इतने प्रसन्न हुए कि उन्होंने उसे मुक्त कर दिया और उसका नाम ‘रावण’ (जिसका अर्थ है- तेज गर्जना करने वाला) रखा।
5. अभिभावकों के लिए: क्यों सिखाएं बच्चों को यह स्तोत्र?
आजकल के पेरेंट्स अक्सर पूछते हैं कि बच्चों को संस्कृत या स्तोत्र सिखाने का क्या लाभ है?
इसके कई वैज्ञानिक और मानसिक फायदे हैं:
* भाषण स्पष्टता (Speech Clarity): इसमें जो ‘ड’ और ‘ट’ वर्णों का बार-बार प्रयोग हुआ है, वह बच्चों की जीभ की एक्सरसाइज कराता है, जिससे उनका उच्चारण साफ होता है।
* आत्मविश्वास (Confidence): जब बच्चा इतने कठिन शब्दों को लय में बोलता है, तो उसका आत्म-बल बढ़ता है।
* सांस्कृतिक जुड़ाव: यह उन्हें बताता है कि हमारी संस्कृति कितनी समृद्ध और शक्तिशाली है।
* अनुशासन: गुरुकुल पद्धति के अनुसार, सुबह के समय इसका पाठ करने से बच्चों में अनुशासन आता है।
6. एक नया संकल्प: क्षमा प्रार्थना
लेख के अंत में, हम एक और छोटा लेकिन महत्वपूर्ण श्लोक सीखेंगे, जो बच्चों को अपनी गलतियों की माफी मांगना सिखाता है:
> करचरण कृतं वाक्कायजं कर्मजं वा।
> श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं।
> विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व।
> जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
>
अर्थ: “हे महादेव, मेरे हाथों, पैरों, वाणी, शरीर, काम, कान, आँख या मन से जो भी गलतियाँ हुई हों, आप उन्हें क्षमा करें। आपकी जय हो!”
निष्कर्ष (Conclusion)
महादेव शिव केवल विनाश के देवता नहीं हैं, वे नृत्य, संगीत, ज्ञान और करुणा के भी देवता हैं। ‘शिव ताण्डव स्तोत्र’ हमें सिखाता है कि शक्ति के साथ भक्ति और कला का मेल कितना सुंदर हो सकता है।
अगले अंक में हम दूसरे श्लोक के रहस्यों को समझेंगे। तब तक के लिए— ओम नमः शिवाय!
















Leave a Reply