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शहीदी सप्ताह( 21 दिसंबर – 27 दिसंबर) : साहिबजादों का अद्भुत साहस, बच्चों के लिए अमर प्रेरणा

शहीदी सप्ताह( 21 दिसंबर – 27 दिसंबर) : साहिबजादों का अद्भुत साहस, बच्चों के लिए अमर प्रेरणा

लेखिका : मोनिका गुप्ता

21 से 27 दिसंबर का सप्ताह भारतीय इतिहास में शहीदी सप्ताह के रूप में जाना जाता है। यह सप्ताह हमें सिख इतिहास की उन अमर घटनाओं की याद दिलाता है, जब गुरु गोबिंद सिंह जी के चारों पुत्रों – जिन्हें साहिबजादे कहा जाता है – ने धर्म, सत्य और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।

22 दिसंबर 1704 को चमकौर की लड़ाई में गुरु गोबिंद सिंह जी के बड़े पुत्र साहिबजादा अजीत सिंह (18 वर्ष) और साहिबजादा जुझार सिंह (14 वर्ष) ने मुग़ल सेना के सामने अद्भुत वीरता दिखाई। वे जानते थे कि सामने विशाल सेना है, फिर भी उन्होंने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। उनका साहस हमें सिखाता है कि उम्र छोटी हो सकती है, लेकिन हिम्मत और सच्चाई बड़ी होती है।

कुछ ही दिन बाद, 26 और 27 दिसंबर को, गुरु जी के छोटे पुत्र साहिबजादा ज़ोरावर सिंह (9 वर्ष) और साहिबजादा फतेह सिंह (7 वर्ष) को धर्म बदलने का लालच दिया गया। जब उन्होंने सत्य और अपने विश्वास को नहीं छोड़ा, तो उन्हें दीवार में ज़िंदा चुनवा दिया गया। इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा बलिदान पूरे संसार में विरल है।

अपने पोतों की शहादत का समाचार सुनकर, माता गुजरी जी ने भी अपने प्राण त्याग दिए। यह पूरा परिवार मानव इतिहास में त्याग, साहस और आत्मबलिदान का सर्वोच्च उदाहरण बन गया।

बच्चों के लिए यह कथा केवल इतिहास नहीं, बल्कि जीवन का संदेश है। साहिबजादे हमें सिखाते हैं कि:

सत्य के मार्ग पर डटे रहना सबसे बड़ा साहस है।

डर से बड़ा आत्मविश्वास होता है।

सही और गलत में अंतर समझना ही सच्ची शिक्षा है।

आज के समय में जब बच्चे छोटी-छोटी बातों से घबरा जाते हैं, साहिबजादों की शहादत हमें सिखाती है कि आत्मबल, संस्कार और नैतिक मूल्य ही सच्ची शक्ति हैं।

गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने जीवन में सिखाया कि धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और साहस का मार्ग है। उन्होंने अपने परिवार का बलिदान देकर आने वाली पीढ़ियों को यह अमूल्य शिक्षा दी कि सच्चाई के लिए खड़े रहना ही सबसे बड़ा धर्म है।

शहीदी सप्ताह हमें यह संकल्प लेने का अवसर देता है कि हम अपने बच्चों को केवल पढ़ाई ही नहीं, बल्कि साहस, संस्कार और मानवता भी सिखाएँ। यही साहिबजादों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।

नमन है उन वीर बाल शहीदों को, जिन्होंने पूरी दुनिया को साहस का अर्थ समझाया।

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