संवाददाता:-
हर्षल रावल
17 मार्च, 2026
सिरोही/राज.
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स्वामी महंत श्री रूपपुरीजी महाराज ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सनातन नववर्ष बड़े धूमधाम से मनाएं।

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सिरोही। जिले के शिवगंज तहसील झाड़ोली (वीर) में वोवेश्वर महादेव मंदिर (मठ़) के मठाधीश स्वामी महंत श्री रूपपुरीजी महाराज ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा सनातन नववर्ष इस पवित्र पावन पर्व को बड़े उत्साह के साथ बालक, युवा, वृध्द अपने सपरिवार सहित मनाएं।
स्वामी महंत रूपपुरी ने कहा कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को सृष्टी की निर्मिति हुई, इसलिए इस दिन हिन्दू नववर्ष मनाया जाता है। इस दिन को संवत्सरारंभ, गुडी पाड़वा, विक्रम संवत् वर्षारंभ, युगादी, वर्ष प्रतिपदा, वसंत ऋतु प्रारंभ दिन आदी नामों से भी जाना जाता है। यह दिन महाराष्ट्र में ‘गुडीपाड़वा’ के नाम से भी मनाया जाता है। गुडी अर्थात् ध्वजा। पाडवा शब्द में ‘पाड’ का अर्थ होता है पूर्ण; एवं ‘वा’ का अर्थ है वृद्धिंगत करना, परिपूर्ण करना। इस प्रकार पाडवा शब्द का अर्थ है, परिपूर्णता।

वर्षारंभ दिन क्यों मनाएं ?
भिन्न-भिन्न संस्कृति अथवा उद्देश्य के अनुसार नववर्ष का आरंभ भी विभिन्न तिथियों पर मनाया जाता हैं। उदाहरणार्थ, ईसाई संस्कृति के अनुसार इसवी सन् १ जनवरी से आरंभ होता है, जबकि हिंदु नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है। आर्थिक वर्ष १ अप्रैल से आरंभ होता है, शैक्षिक वर्ष जून से आरंभ होता है, जबकि व्यापारी वर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से आरंभ होता है।
वर्षारंभ मनाने का नैसर्गिक कारण:-
भगवान श्रीकृष्णजी अपनी विभूतियोंके संदर्भ में बताते हुए श्रीमद्भगवद्गीता में कहते हैं,
बृहत्साम तथा साम्नां गायत्री छन्दसामहम् ।
मासानां मार्गशीर्षोऽहमृतूनां कुसुमाकरः ।। – श्रीमद्भगवद्गीता (१०.३५)

अर्थ : ‘सामोंमें बृहत्साम मैं हूं । छंदोंमें गायत्रीछंद मैं हूं । मासोंमें अर्थात् महीनोंमें मार्गशीर्ष मास मैं हूं; तथा ऋतुओंमें वसंतऋतु मैं हूं ।’
सर्व ऋतुओं में बहार लानेवाली ऋतु है, वसंत ऋतु। इस काल में उत्साहवर्धक, आह्लाददायक एवं समशीतोष्ण वायु होती है। शिशिर ऋतु में पेडों के पत्ते झड चुके होते हैं, जबकि वसंत ऋतु के आगमन से पेडों में कोंपलें अर्थात नए कोमल पत्ते उग आते हैं, पेड-पौधे हरे-भरे दिखाई देते हैं। कोयल की कूक सुनाई देती है। इस प्रकार भगवान श्रीकृष्णजी की विभूतिस्वरूप वसंत ऋतु के आरंभ का यह दिन है।
वर्षारंभ मनाने के ऐतिहासिक कारण:-
१. इस दिन रामने वाली का वध किया ।
२. शकोंने प्राचीनकाल में शकद्वीप पर रहनेवाली एक जाति हुणोंको पराजित कर विजय प्राप्त की ।
३. इसी दिनसे ‘शालिवाहन शक’ प्रारंभ हुआ; क्योंकि इस दिन शालिवाहनने शत्रुपर विजय प्राप्त की ।
वर्षारंभ दिन मनाने का आध्यात्मिक कारण
ब्रह्मांड की निर्मिति का दिन:-
ब्रह्मदेव ने इसी दिन ब्रह्मांड की निर्मिति की। उनके नाम से ही ‘ब्रह्मांड’ नाम प्रचलित हुआ। सत्ययुग में इसी दिन ब्रह्मांड में विद्यमान ब्रह्मतत्त्व प्रथम बार निर्गुण से निर्गुण-सगुण स्तर पर आकर कार्यरत हुआ तथा पृथ्वी पर आया।
सृष्टि के निर्माण का दिन:-
ब्रह्मदेव ने सृष्टि की रचना की, तदूपरांत उसमें कुछ उत्पत्ति एवं परिवर्तन कर उसे अधिक सुंदर अर्थात परिपूर्ण बनाया। इसलिए ब्रह्मदेव द्वारा निर्माण की गई सृष्टि परिपूर्ण हुई, उस दिन गुडी अर्थात धर्मध्वजा खडी कर यह दिन मनाया जाने लगा।
चैत्रे मासि जगद् ब्रम्हाशसर्ज प्रथमेऽहनि । – ब्रम्हपुराण
अर्थ : ब्रम्हाजी ने सृष्टि का निर्माण चैत्र मास के प्रथम दिन किया। इसी दिन से सत्ययुग का आरंभ हुआ। यहीं से हिन्दू संस्कृति के अनुसार कालगणना आरंभ हुई । इसी कारण इस दिन वर्षारंभ मनाया जाता है।

















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