(दुद्धी सोनभद्र रिपोर्ट नितेश कुमार)
विंढमगंज/सोनभद्र। स्थानीय थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महुली में श्री शंकर झंकार नाट्य कला परिषद के तत्वावधान में नाट्य कला का पांचवां दिन “जालिम सास”का मंचन किया गया। जिसमें गंगादेई का अभिनय श्री राजेश शर्मा के द्वारा किया गया। गंगादेई का दो लड़का एक लड़की थी। बड़ा नारायण और छोटा मदन था। नारायण के पत्नी लक्ष्मी व नारायण का लड़का गोपी था। तथा गंगादेई की बेटी जमुना थी व दामाद सीताराम था।जब सीताराम अपने धर्मपत्नी को लेने अपने ससुराल आया तो सास रामदेई अचानक गुस्से में हो गई। कहने लगी कि हमारी बेटी तुमसे नहीं जायेगी। अभी कुछ दिन ससुराल में रहकर झाड़ू लगाओ तथा कपड़ा व बर्तन साफ करो, सीताराम बेचारा क्या करे पत्नी के लिए सास रामदेई का बात मानकर सभी काम करने लगा।रामदेई की लड़की जमुना भी अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती थी तथा अपने पति का शिकायत अपने मां से बढ़ा, चढ़ा कर करती थी। अपने बेटी का बात मानकर रामदेई अपने दामाद सीताराम को काफी परेशान कर रखी थी। सीताराम का अभिनय श्री अवधेश शर्मा के द्वारा बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया गया।रामदेई अपने बहु पर भी काफी जुल्म ढा रही थी। वाकई में निर्दयी सास की भुमिका में रामदेई शुरू से अंत तक बनी रही। देखने वाले दर्शको की संख्या काफी काफी मात्रा में अंत तक बनी रही। सीन मास्टर विक्की शर्मा तथा नाट्य कला को बहुत ही शानदार तरीके से खेलाने की जिम्मेदारी श्री शिवदाश शर्मा, महेंद्र पुरी के द्वारा किया गया। तथा मंच पर कमेटी के लोग व्यवस्था में लग रहे।




विंढमगंज/सोनभद्र। स्थानीय थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत महुली में श्री शंकर झंकार नाट्य कला परिषद के तत्वावधान में नाट्य कला का पांचवां दिन “जालिम सास”का मंचन किया गया। जिसमें गंगादेई का अभिनय श्री राजेश शर्मा के द्वारा किया गया। गंगादेई का दो लड़का एक लड़की थी। बड़ा नारायण और छोटा मदन था। नारायण के पत्नी लक्ष्मी व नारायण का लड़का गोपी था। तथा गंगादेई की बेटी जमुना थी व दामाद सीताराम था।जब सीताराम अपने धर्मपत्नी को लेने अपने ससुराल आया तो सास रामदेई अचानक गुस्से में हो गई। कहने लगी कि हमारी बेटी तुमसे नहीं जायेगी। अभी कुछ दिन ससुराल में रहकर झाड़ू लगाओ तथा कपड़ा व बर्तन साफ करो, सीताराम बेचारा क्या करे पत्नी के लिए सास रामदेई का बात मानकर सभी काम करने लगा।रामदेई की लड़की जमुना भी अपने पति के साथ नहीं जाना चाहती थी तथा अपने पति का शिकायत अपने मां से बढ़ा, चढ़ा कर करती थी। अपने बेटी का बात मानकर रामदेई अपने दामाद सीताराम को काफी परेशान कर रखी थी। सीताराम का अभिनय श्री अवधेश शर्मा के द्वारा बहुत ही बेहतरीन तरीके से किया गया।रामदेई अपने बहु पर भी काफी जुल्म ढा रही थी। वाकई में निर्दयी सास की भुमिका में रामदेई शुरू से अंत तक बनी रही। देखने वाले दर्शको की संख्या काफी काफी मात्रा में अंत तक बनी रही। सीन मास्टर विक्की शर्मा तथा नाट्य कला को बहुत ही शानदार तरीके से खेलाने की जिम्मेदारी श्री शिवदाश शर्मा, महेंद्र पुरी के द्वारा किया गया। तथा मंच पर कमेटी के लोग व्यवस्था में लग रहे।













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