जिला पांढुर्ना में पर्यावरण परिषद की नवनियुक्त कलेक्टर से सौजन्य भेंट
संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुर्ना, म.प्र. — जिला पांढुर्ना के नवनियुक्त कलेक्टर श्री नीरज कुमार वशिष्ठ से आज पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन संवर्धन परिषद इकाई मध्य प्रदेश भारत, जिला पांढुर्ना की टीम ने सौजन्य मुलाकात की। मुलाकात के दौरान टीम ने जिले में हो रहे पौधारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों की विस्तृत जानकारी कलेक्टर महोदय को दी।
जिले में 70,000 से अधिक पौधे लगाए गए
परिषद ने जानकारी दी कि जिले में अब तक 70,000 से अधिक पौधों का रोपण विभिन्न विभागों द्वारा किया गया है। टीम ने बताया कि पौधों के संरक्षण और संवर्धन के लिए ट्री गार्ड तथा जल व्यवस्थाओं की आवश्यकता है।
कलेक्टर वशिष्ठ जी ने इस विषय पर तुरंत आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए और संबंधित विभागों को कार्यवाही करने के निर्देश दिए
स्वदेशी पौधों और जैविक खेती पर जोर

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जिले में विदेशी प्रजातियों की बजाय स्वदेशी छायादार और फलदार पौधों का रोपण प्राथमिकता से किया जाए। उन्होंने किसानों को जैविक और आर्गेनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करने की बात कही और रासायनिक उर्वरकों से होने वाले दुष्प्रभावों पर चिंता व्यक्त की।
प्रशासन देगा पर्यावरण को हरसंभव सहयोग
कलेक्टर वशिष्ठ जी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा पर्यावरण परिषद को सभी संभव सहयोग प्रदान किया जाएगा ताकि जिले में हरियाली और स्वच्छता का विस्तार हो सके। उन्होंने परिषद के प्रयासों की सराहना करते हुए सामूहिक जनभागीदारी को पर्यावरण संरक्षण की कुंजी बताया
बैठक में उपस्थित सदस्य

बैठक के दौरान परिषद इकाई म.प्र. (भरत) से रुपेश कासलीकर (जिला अध्यक्ष, पांढुर्ना), एड. रवि धुर्वे, एड. प्रदीप दुपारे, गुलाबराव डिगरसे, सुरज जायसवाल, विजय आखरे, राजेंद्र ठाकरे, नीलेश हिवसे, पदमाकर पाबले, संजय डोबले, ओमप्रकाश डिगरसे, तरूण अहाके, किशोर डिगरसे, चन्दन कवड़ेती, वासुदेव गोरे, संजय गोहटे, शुभम यमदे, हरिचंद्र नेहारे, यशवंत घाघरे, पलाश वालके, तथा निलेश कलसकर (पत्रकार) सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रतिबद्धता
बैठक के समापन पर यह निर्णय लिया गया कि जिले में सामूहिक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, जैविक कृषि, और हरियाली अभियान को आगे बढ़ाया जाएगा। परिषद व प्रशासन मिलकर जिले को एक हरित और स्वच्छ पर्यावरणीय मॉडल बनाने के लिए कार्य करेंगे।


















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