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विजयादशमी और संघ शताब्दी वर्ष पर पांढुरना में संघ का भव्य पथ संचलन — राष्ट्रभाव से ओतप्रोत दृश्य

विजयादशमी और संघ शताब्दी वर्ष पर पांढुरना में संघ का भव्य पथ संचलन — राष्ट्रभाव से ओतप्रोत दृश्य

संवाददाता धनंजय जोशी
जिला पांढुरना मध्य प्रदेश

पांढुरना – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का स्थापना दिवस, विजयादशमी, इस वर्ष पांढुरना नगर में एकता, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत उदाहरण बनकर सामने आया। शताब्दी वर्ष की पृष्ठभूमि में आयोजित यह पथ संचलन न केवल संघ के संगठनात्मक बल का परिचायक था, बल्कि समाज के हर वर्ग में राष्ट्रभावना को जगाने वाला एक प्रेरक आयोजन सिद्ध हुआ।

दोपहर 1:30 बजे नगर की छह प्रमुख बस्तियों — राधाकृष्ण बस्ती, चंद्रशेखर आजाद बस्ती, गुरुदेव बस्ती, संत रविदास बस्ती, संत जलाराम बस्ती और संत तुकाराम बस्ती से एक साथ गणवेशधारी स्वयंसेवकों की टोलियाँ अपनी अपनी बस्तियों में संघ प्रार्थना और ध्वज प्रणाम के बाद नारे और घोष के साथ निकलीं। भगवा ध्वज के सान्निध्य में अनुशासित पंक्तियों में चलते स्वयंसेवकों का यह दृश्य अत्यंत आकर्षक और प्रेरणादायक था। विशेष कर नन्हे मुन्ने स्वयंसेवक आकर्षण का केंद्र रहे और उनकी ऊर्जा और उमंग ने सभी को प्रभावित किया।

प्रत्येक टोली ने अपनी-अपनी बस्तियों में भ्रमण करते हुए नागरिकों को संघ के मूल्य, संस्कार और सेवा भावना का संदेश दिया। नगर के मुख्य मार्गों पर लोग पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत करते दिखे। अनेक स्थानों पर व्यापारी संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और मातृशक्ति समूहों ने संचलन का अभिनंदन कर देशभक्ति गीतों के साथ माहौल को उल्लासमय बना दिया।

कुछ ही देर बाद सभी टोलियाँ तीन शेर चौक पर एकत्र हुईं , जहाँ संगठित रूप में हुआ मुख्य संचलन नगरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। सभी स्वयं सेवक कदम ताल करते हुए नगर पालिका मैदान पर पहुंचे जहां पथ संचलन का समापन हुआ।स्वयंसेवकों के कदमों की सामूहिक लय, घोषों की गूँज और राष्ट्रध्वज को प्रणाम का क्षण – हर दर्शक के मन में गर्व और सम्मान की भावना भर गया।

संचलन के पूर्व सभी 6 बस्तियों में संघ पदाधिकारियों ने अपने उद्बोधन में संगठन की भूमिका, समाजसेवा के आयाम और युवाओं की जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि संघ केवल शाखा या गणवेश तक सीमित नहीं, बल्कि यह चरित्र निर्माण और राष्ट्र पुनर्निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है।

इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, नगर के गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे उपस्थित रहे।

संघ का संदेश


विजयादशमी के इस अवसर पर आरएसएस ने पुनः यह संदेश दिया कि जब समाज का हर वर्ग अपने कर्तव्यों और संस्कारों के प्रति सजग रहेगा, तभी भारत विश्व में “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना को साकार कर सकेगा।
पुलिस प्रशासन ने इस दौरान पूर्ण संचलन मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को संभाले रखा। एवं यातयात व्यवस्था को भी सुचारू रखा।

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