कटनी: नशे का काला कारोबार फल-फूल रहा, प्रशासन की लापरवाही और राजनीतिक संरक्षण ने शहर को तबाही की ओर धकेला

*कटनी, 11 सितंबर 2025 (विशेष संवाददाता)*: मध्य प्रदेश का एक बार शांतिप्रिय शहर कटनी आज नशे के घिनौने कारोबार का गढ़ बन चुका है। अवैध शराब, गुटखा, तंबाकू और ड्रग्स की बाढ़ ने न केवल युवाओं का भविष्य चुरा लिया है, बल्कि समाज को अपराध, हिंसा और हत्याओं की भेंट चढ़ा दिया है। इस संकट की जड़ में प्रशासन की लचर नीतियां, घोषित राजनीतिक संरक्षण और बेरोजगारी जैसे कारक हैं, जो नशे के व्यापारियों को खुली छूट दे रहे हैं। आम जनमानस का दर्द अब चरम पर है, और सवाल उठ रहा है कि क्या कटनी का प्रशासन इस महामारी से निपटने को तैयार है या फिर यह सब सत्ता के खेल का हिस्सा मात्र है?
शहर में नशाखोरी का यह काला साया इतना गहरा हो चुका है कि हाल के महीनों में नशे से प्रेरित अपराधों की संख्या में भारी उछाल देखा गया है। युवा नशे की चपेट में आकर परिवारों को तहस-नहस कर रहे हैं, जबकि बच्चे इस जाल में फंसकर अपना बचपन खो बैठे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासन की निष्क्रियता ने इस समस्या को और विकराल रूप दे दिया है। बेरोजगारी के अभाव में युवा आसानी से नशे की गिरफ्त में आ जाते हैं, और राजनीतिक संरक्षण के चलते अवैध व्यापारी बेखौफ घूम रहे हैं। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “प्रशासन की आंखें बंद हैं, जबकि हमारे बच्चे नशे के शिकार हो रहे हैं। यह लापरवाही नहीं, अपराध है।”
*प्रशासन की नाकामी: छापेमारी तो चलती है, लेकिन कारोबार थमता नहीं*
पिछले कुछ महीनों में कटनी पुलिस ने अवश्य ही ‘ऑपरेशन शिकंजा’ जैसे अभियान चलाए हैं, जहां 58 स्थानों पर दबिश देकर 1.80 लाख रुपये की अवैध शराब जब्त की गई और 58 आरोपी गिरफ्तार हुए। लेकिन सवाल यह है कि ये छापेमारियां क्यों केवल दिखावे तक सीमित रह जाती हैं? नशे के बड़े माफिया आज भी खुले आम कारोबार चला रहे हैं, क्योंकि राजनीतिक आशीर्वाद और प्रशासनिक मिलीभगत उन्हें बचाए रखती है। जिला कांग्रेस सेवादल और इंडिया विद कांग्रेस (IWC) के नेताओं ने भी बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कहा कि अवैध शराब, चोरी-डकैती जैसी घटनाएं प्रशासन की कमजोर पकड़ का नतीजा हैं।
प्रदेश अध्यक्ष मंगल सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार को IWC मध्य प्रदेश ने पुलिस अधीक्षक कटनी को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें नशाखोरी और इससे जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने की कड़ी मांग की गई। ज्ञापन में स्पष्ट शब्दों में कहा गया कि कटनी में नशे का अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है, जिससे युवाओं और बच्चों का भविष्य खतरे में है। हाल ही में नशे के कारण कई गंभीर अपराध और यहां तक कि हत्याएं तक हुई हैं, जो समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बने हुए हैं। संगठन ने प्रशासन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि लचर नीतियां और राजनीतिक संरक्षण ही इस कारोबार को पनपने दे रहे हैं।
*ज्ञापन की प्रमुख मांगें: प्रशासन को जगाने का प्रयास*
ज्ञापन में रखी गई मांगें न केवल व्यावहारिक हैं, बल्कि प्रशासन की नाकामी को उजागर करने वाली भी। संगठन ने मांगा है:
– *शहर की सभी अवैध शराब, गुटखा, तंबाकू और ड्रग्स की दुकानों पर रात 10 बजे के बाद पूर्ण प्रतिबंध*: रात्रि में ये दुकानें युवाओं को आसानी से नशा उपलब्ध करा रही हैं, जिस पर प्रशासन की कोई सख्ती नहीं दिखती।
– *18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को नशा बेचने पर कठोर दंड*: बच्चों को निशाना बनाना सबसे घातक है, फिर भी मेडिकल स्टोर्स और ठेकों पर कोई निगरानी नहीं।
– *मेडिकल स्टोरों से बिकने वाली सिरप और दवाओं के दुरुपयोग पर कड़ी नजर*: कुछ दवाओं का नशे के रूप में इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन फार्मासिस्टों पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
– *अवैध व्यापारियों पर सतत छापेमारी और अभियान*: एकाध छापे पर्याप्त नहीं, निरंतर अभियान चलाने होंगे, अन्यथा यह सब ढाक के तीन पात साबित होगा।
– *जन जागरूकता अभियान*: नशा मुक्ति के लिए आम जनता में जागृति फैलाई जाए, ताकि प्रशासन अकेला न रहे।
ये मांगें प्रशासन के लिए चुनौती हैं, क्योंकि इन्हें लागू करने में राजनीतिक दबाव बाधा बन सकता है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कार्रवाई न हुई, तो बड़े आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
*संगठन का संकल्प: जनता के साथ खड़े संगठन, प्रशासन के खिलाफ आवाज*
इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष मंगल सिंह के साथ संगठन के प्रमुख पदाधिकारी और सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। इनमें उदय भारत सिंह गौड़, बृजेश मौर्य, दिग्विजय सिंह अडिग, मुन्ना भाई जान, हिमांशु तिवारी, ओमप्रकाश सकतेल, कपिल विश्वकर्मा, ब्रजेश यादव, शेख रजक, हर्ष कुमार सेन, राहुल सिंह, मृत्युंजय सेन, जितेंद्र सिंह, मनजीत सिंह सहित अन्य कार्यकर्ता शामिल थे। मंगल सिंह ने कहा, “प्रशासन की नींद टूटनी चाहिए। कटनी के लोग अब चुप नहीं रहेंगे। नशे का यह कारोबार शहर की साख को धूल में मिला रहा है, और हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
*समाज का दर्द: बेरोजगारी और राजनीतिक खेल ने बिगाड़ा खेल*
कटनी की बेरोजगारी की समस्या नशे को बढ़ावा देने का प्रमुख कारण बनी हुई है। युवा बेरोजगार घूमते हैं, तो नशा ही उनका सहारा बन जाता है। ऊपर से राजनीतिक संरक्षण मिलने पर व्यापारी बेखौफ हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि प्रशासन सख्ती से नीतियां लागू करे, तो यह संकट टाला जा सकता है। लेकिन वर्तमान हालातों में लगता है कि सत्ता के गलियारों में नशे का कारोबार सुरक्षित है।
कटनी के निवासियों की पुकार अब जोर पकड़ रही है। क्या प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा, या फिर यह ज्ञापन भी फाइलों की धूल में दब जाएगा? समय रहते कदम उठाना ही शहर को बचा सकता है, अन्यथा नशे की यह आग पूरे समाज को भस्म कर देगी।

















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