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लल्लू भैया की तलैया-इस ऐतिहासिक तलैया के नामकरण का भी अजीब किस्सा है

लल्लू भैया की तलैया-इस ऐतिहासिक तलैया के नामकरण का भी अजीब किस्सा है।

राजेंद्र प्रसाद अग्रवाल
लेखक कटनी अतीत दर्शन
अग्रसेन स्टेशनर्स कटनी

यह तलैया इस क्षेत्र के सदर मालगुजार रहें, खान बहादूर की पदवी से विभूषित श्री टिमरसजी बजान द्वारा क्षेत्र के किसी वक्त पडे अकाल के आस-पास खुदवाई गई थी। लगभग 1815 के अकाल में कावसजी जिन्हें बाद में टिमरसजी बजान ने गोद ले लिया था के नाम पर से यह तलैया वषों तक जानी जाती रहे। किन्तु पूर्व विधायक लल्लू मैया के अभ्युदय के साथ ही उनके घर के सामने स्थित इस तलैया को लल्लू मैया की तलैया के नाम से जाना जाने लगा वास्तव में तलैया कावसजी की तलैया है। वर्तमान में इस प्राचीन तालाब का अस्तित्व संकट में है। आधा तलाब कब्जे के चक्कर में पूरा जा चका है। तालाब के चारों ओर विद्युत मंडल, दूरदर्शन टाबर, मघई, मंदिर, जायसवाल धर्मशाला, मकान, दंकान, सड़के हैं। घाट के पत्थर टूट गये है अतिक्रमण कारी व लोगों द्वारा कचरा डालकर इसका अस्तित्व समाप्त किया जा रहा है। लगभग 2.61 एकड़ क्षेत्र का तालाब का कुछ हिस्सा ही बचा है। इस तालाब में कभी लबालब पानी रहता था । सन् 1960 एवं 1990 के दौरान गोल बाजार में लगी भीषण आग के लिए फायर ब्रिगेड़ ने यहा से पानी लिया था। हर धार्मिक कार्य कजलियां, मेला, होली पर्व, परिया उत्सव, व अन्य पर्वो पर यहां रौनक चहल पहल रहती थी। कभी तलाब में मोटर बोट चलती थी। दैनिक उपयोगी था । 1994-95 में तालाब के व्यवसायीकरण पर तत्कालीन अतिरिक्त जिला प्रशासन ने रोक लगाई थी, जिसे उच्च न्यायलय में चुनौती दी गई थी । बाद में वहां से शासकीय पक्ष में फैसला होने पर लगभग सवा वर्ष पूर्व एक बार फिर इसे सार्वजनिक घोषित कर अतिक्रमण हटाने की मुहिम छेड़ी गई थी, जो तत्कालीन अतिरिक्त जिलाध्यक्ष कटनी जिला के जाते ही ठंडे बस्ते में डाल दी गई। नई बस्ती क्षेत्र में लुत्तुसिंह की तलैया का भी यही हाल हुआ है। जिसे पूरकर टुकड़े-टुकड़ों में उसे बेचा जाकर भवन बनाए जा चुके है। फारेस्टर प्ले ग्राउंड में पुराने बस स्टेण्ड के समीप स्थित तलैया भी पूरी जा चुकी है। शहर के घनी बसाहट में इकलौती शेष लल्लूभैया के तालाब को भी अब हड़पने की साजिस की जारही है। अब अन्य क्षेत्रों अमीरगंज (पड़रवाराड़ा), सिंधी कैम्प (माधवनगर), झिंझरी, पुरैनी, कुठला चाका, कैलवारा, नये बस स्टैण्ड के पीछे, खिरहनी एवं अन्य क्षत्रों में चंद तालाब शेष है।

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