समस्तीपुरः जिला अंतर्गत बंगरा पुलिस ने थाना क्षेत्र के मध्य विद्यालय में महिला सशक्तिकरण सभा का आयोजन किया।
राजीव कुमार सिन्हा
समस्तीपुर
आयोजित इस सभा के माध्यम से बंगरा थानाध्यक्ष सुश्री मनिषा कुमारी ने, विद्यालय के बच्चों के सामने परिस्थितिजन्य संवेदनशीलता के बारे में जानकारी देते हुए, उन्हें लैंगिक अपराध, ईलेक्ट्रॉनिक उपकरण/इंटरनेट/मल्टीमीडिया सेल फोन का उपयोग करते हुए बच्चियों के साथ होने वाले अपराध व उससे बचाव के बारे में विस्तारपूर्वक बताया। बंगरा थानाध्यक्ष सुश्री मनिषा कुमारी ने सशक्तीकरण सभा के माध्यम से बच्चियों को बताया कि, मानव को परम पिता परमात्मा की सर्वश्रेष्ठ कृति कहा जाता है।
मानव के भीतर प्रेम, दया, करुणा, शोक, सहानुभूति, संवेदना आदि संवेगों का अथाह सागर है। मनुष्य एक संवेदनशील प्राणी माना जाता है। वह दूसरों के सुख-दुख में सहायता करता है। संवेदनशीलता से तात्पर्य मानव का किसी वस्तु, घटना अथवा व्यक्ति के प्रति शारीरिक तथा भावनात्मक अभिव्यक्ति व प्रतिक्रिया देना है। प्रत्येक मानव अपनी संवेदनाओं को अलग-अलग रूपों में अभिव्यक्त करता है। प्राचीन काल में हम अपने सगे- संबंधियों का हाल-चाल पत्रों द्वारा पूछते थे। उसी पत्र के माध्यम से हम अपनी भावनाओं व संवेदनाओं को प्रकट किया करते थे, लेकिन अब तकनीकी विकास इतनी ज्यादा हो चुकी है कि, बस ऊंगली के एक क्लिक करते ही सारी जानकारी हमारी आंखों के सामने आ जाती है।
हालांकि इस तकनीकी विकास ने जितने सहूलियत दिए हैं, गलत प्रवृति के लोगों ने इस तकनीकी विकास का ही इस्तेमाल करते हुए उससे ज्यादा परेशानी भी बढ़ाए हैं। साइबर के इस बढ़ते प्रभाव ने युवा पीढ़ी को बुरी तरह प्रभावित किया है। इंटरनेट, फेसबुक, व्हाट्सएप्प, ट्विटर आदि समेत अनेक सोशल नेटवर्किंग साइट्स ने युवाओं तथा बच्चों पर बुरा प्रभाव डाला है। वर्तमान समय में छोटे-छोटे बच्चों तक, ऑनलाइन/साइबर के माध्यम से हर प्रकार का ज्ञान पहुंच रहा है, चाहे वह ज्ञान उन बच्चों के लिए आवश्यक हो या नहीं हो। जिसका नतीजा यह हो रहा है कि, हमारे आस-पास बच्चे उम्र से पहले ही बड़े हो रहे हैं। यह साईबर युग बच्चों का बचपन छिन रहा है। बच्चों की कल्पनाशीलता प्रभावित हो रही है। संवेदनाओं के ह्रास के कारण अपराधों में निरंतर वृद्धि हो रही है।

















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