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संसार मे रहकर भी संसार को तजा जा सकता है – मुनि मौन सागर जी

संसार मे रहकर भी संसार को तजा जा सकता है – मुनि मौन सागर जी

श्री त्रिमूर्ति मन्दिर में हुआ गुरुपूर्णिमा एवं मुनि संघ के चातुर्मास कलश स्थापना का कार्यक्रम
सत्यार्थ न्यूज़
संवाददात मनोज कुमार माली सोयत कला

सुसनेर। गुरुवार को गुरु पूर्णिमा के अवसर पर समाधिस्थ मुनि भूतबलि सागर जी के शिष्य मुनि मौन सागर जी महाराज ससंघ के चातुर्मास कलश स्थापना का कार्यक्रम त्रिमूर्ति मन्दिर में किया गया। कार्यक्रम में धर्मसभा को सम्बोधित करते हुए मुनि श्री मौन सागर जी ने कहा कि जैन आगम जीवन को सार्थक करने की प्रेरणा देते है। जीवन मे नियम, संयम, तप, शील, त्याग को धारण करने का कार्य करना चाहिए। जीव संसार मे रहकर भी संसार को तज सकता है। धर्म सभा को श्री मुनि सागर जी ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाचरण के साथ हुई। समाधिस्थ मुनि भूतबलि सागर जी का अष्ट द्रव्य से पूजन किया गया। प्रथम चातुर्मास कलश स्थापना का सौभाग्य श्रीमति मधु दिपेश गोधा इंदौर, द्वितीय कलश हुकुम चंद नीलेश कुमार छाबड़ा देवास व तृतीय कलश अनिल कुमार कमलेश कुमार जैन एसएम परिवार ने प्राप्त किया। संचालन त्रिमूर्ति ट्रस्ट अध्यक्ष अशोक जैन मामा ने किया तथा आभार चातुर्मास समिति अध्यक्ष अनिल जैन ने माना।

शोभायात्रा व महायज्ञ के साथ हुआ विधान का समापन

अष्टान्हिका महापर्व में पुण्यार्जक परिवार अनिल कुमार कमलेश कुमार जैन एसएम द्वारा सकल दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित दस दिवसीय श्री सिद्धचक्र मण्डल विधान का समापन गुरुवार को विश्व शांति महायज्ञ के साथ हुआ। समाज के दीपक जैन पत्रकार ने बताया कि सुबह भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, नित्यनियम व मण्डल विधान का पूजन कर महायज्ञ किया गया। जिसमे इंद्र इंद्राणियो द्वारा विश्व शांति की कामना को लेकर आहुतियां दी गई। उसके बाद नगर में श्री जी के रथ यात्रा की शोभायात्रा निकाली गई। जो त्रिमूर्ति मन्दिर से प्रारम्भ होकर श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन छोटा मन्दिर पहुँची। जहां विधि विधान के साथ भगवान को वेदी जी मे विराजमान किया गया।

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