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आज श्रावण मास के पहले सोमवार के अवसर पर, मिरज तहसील के नजदीक प्राचीन दंडोबा मंदिर की खास रिपोर्ट

रिपोर्टर प्रवीण सिंग राजपूत
मिरज तहसील से
दंडोबा पर्वत का  संग्रहित चित्र

आज श्रावण मास का प्रारंभ हो रहा है श्रावण मास भारतीय परंपरा और श्रद्धा का अनोखा संगम माना जाता है । यह मास भारतीय संस्कृती मे बसे विभिन्न व्रत एवं धार्मिक त्योहार मनाने के लिये जाना जाता है । श्रावण मास, जिसे सावन का महीना भी कहा जाता है, भगवान शिव की पूजा करने और उनका आशीर्वाद पाने के लिए मनाया जाता है। आज हमारे मिरज तहसील के रिपोर्टर प्रवीण राजपूत ने मिरज तहसील के नजदीक बसे और पाच गाव के सीमा पर स्थित प्राचीन दंडकारण्य एवं दंडनाथ मंदिर जो दंडोबा के उचे पर्वत मे बसा है और माना जाता है कि रामायण काल मे बताया गया दंडकारण्य यही था रामायण काल मे श्री राम जी के साथ सीता माता ने कुछ दिन इस पर्वत पर गुजारे थे । लगभग ग्यारा सौ पचास हेक्टर क्षेत्र मे दंडोबा का जंगल भी है बारिश की वजह से इस पर्वत पर नजारा खूब दिखाई देता है । इस पर्वत पर दंडनाथ का प्राचीन मंदिर है । श्रावण मास के तीसरे और चौथे सोमवार यह यात्रा होती है तब लाखों श्रद्धालु यहां भगवान भोलेनाथ जी के दर्शन के लिये जाते है । इस पर्वत पर जाने आने के लिए पक्की सड़क बनाई गई है दंडोबा घने जंगल के लिए भी पहचाना जाता है । विभिन्न जंगली जानवरों का अधिवास यह देखने को मिलता है और तो और यहा बहोत सी मराठी फिल्म की शूटिंग भी होती रहती है । इस पर्वत जो भगवान शिवजी का मंदिर है वो पर्वत से तराशा गया है जो एक गुफा जैसी है

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