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ऑनलाइन दुनिया के जाल से अपने बच्चों को बचाने का तरीका जानिए

सत्यम कुमार आर्य पश्चिमी चंपारण

आज बच्चे पहले के मुकाबले कम उम्र में इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं और दुनिया में हर आधे सेकेंड में एक बच्चा ऑनलाइन होता है.

ऐसे में जानकार चेतावनी दे रहे हैं कि ऑनलाइन दुनिया तक बच्चों की बढ़ती पहुंच से उनके लिए गंभीर ख़तरे भी पैदा हो रहे हैं.

वेस्टर्न सिडनी यूनिवर्सिटी के यंग एंड रेज़िलिएंट सेंटर ने इस बारे में हाल ही में एक स्टडी की है.

इससे पता चला है कि कम आमदनी वाले परिवारों के बच्चे तो ख़ास तौर से अनजान लोगों से अनुचित या ग़ैर-ज़रूरी रिक्वेस्ट ब्लॉक नहीं करते हैं. इस अध्ययन में पाया गया था कि ऐसे लोगों की शिकायत न करने या ब्लॉक नहीं करने की वजह से बच्चे भविष्य में ख़ुद को अनचाहे संपर्क के कहीं ज़्यादा बड़े जोखिम में डाल देते हैं.

ब्रिटेन में ऑनलाइन सेफ्टी एक्ट नाम के नए क़ानून के तहत तकनीकी कंपनियों की ये ज़िम्मेदारी होती है कि वो इंटरनेट पर बच्चों की अधिक सुरक्षा सुनिश्चित करें. लेकिन, इस क़ानून से जुड़े नए नियम 2025 तक लागू नहीं होंगे.

आज दुनिया भर में बच्चे, पहले से कहीं ज़्यादा वक़्त ऑनलाइन होते हैं. संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, दुनिया में हर आधे सेकेंड में कोई न कोई बच्चा पहली बार ऑनलाइन दुनिया में दाख़िल होता है.

 

आंकड़े दिखाते हैं कि दुनिया में कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने में कम उम्र वालों का सबसे ज़्यादा योगदान है. 2023 में दुनिया भर में 15 से 24 साल के 79 प्रतिशत लोग ऑनलाइन हो रहे थे, जो बाक़ी आबादी से 65 प्रतिशत ज़्यादा है.

 

सिडनी के यंग एंड रेज़िलिएंट सेंटर की सह-निदेशक अमांडा थर्ड कहती हैं, ”आज के बच्चे ऑनलाइन दुनिया में ही बड़े हो रहे हैं और लगातार बदल रहे डिजिटल मंज़र में उन्हें इंटरनेट के सुरक्षित रखने के लिए मदद की ज़रूरत होती है.”

 

बच्चों के लिए संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनिसेफ के एक अध्ययन के मुताबिक़- 30 देशों में एक तिहाई से ज़्यादा बच्चों को साइबर दुनिया में दादागीरी और धमकियों का सामना करना पड़ता है. इसकी वजह से लगभग 20 प्रतिशत बच्चे स्कूल जाना बंद कर देते हैं.

 

हेट स्पीच, हिंसक कंटेंट और उग्रवादी संगठनों में भर्ती भी चिंता के विषय हैं. इसके साथ साथ ग़लत जानकारी या फिर साज़िश की मनगढ़ंत कहानियां भी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बहुत चलती हैं. हालांकि, यूनिसेफ का कहना है, ”ऑनलाइन दुनिया में बच्चों को सबसे ज़्यादा ख़तरा यौन शोषण और बुरे बर्ताव से है.”

यूनिसेफ़ के मुताबिक़, ”बच्चों का यौन शोषण करने वालों के लिए अपने शिकार से ऑनलाइन संपर्क करना आज ज़्यादा आसान हो गया है. वो बड़ी आसानी से ऐसी तस्वीरें साझा कर सकते हैं और दूसरों को भी ऐसे अपराध करने के लिए उकसा सकते हैं. 25 देशों में लगभग 80 प्रतिशत बच्चों ने ऑनलाइन दुनिया में यौन शोषण या बुरे बर्ताव के ख़तरों की शिकायत की है.”

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