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आप सभी को जोहार…. सेवा जोहार.. पुनांग तिन्दना पंडुम (नया खानी/नवा खानी महापर्व) एवं गायता जोहारनी की बहुत-बहुत बधाई….एवं ढेरों शुभकामनाएं…

विशेष संवाददाता  राजेन्द्र  मंण्डावी                                                        ‌                                      आप सभी को जोहार…. सेवा जोहार..
पुनांग तिन्दना पंडुम (नया खानी/नवा खानी महापर्व) एवं गायता जोहारनी की बहुत-बहुत बधाई….एवं ढेरों शुभकामनाएं…

                                         पिसलेर_मानेय_न_पुनांग
हालेर_मानेय_न_जुनांग

कांकेर  नया_खानी_पंडुम आदिवासियों में विशेष कर गोण्ड समुदाय में अपने आप में बहुत ही खास महत्व रखता है। क्योंकि यह पंडुम (पर्व) अपने पुरखों अर्थात दादा के दादा के …. दादा के #जीर्र_(डीएनए) तक ले जाता है। इसलिए इस पंडुम को गोंड समाज (गोण्ड- कोयतोर, कोया, मुरिया, माड़िया, दोरला, ….आदि) बड़े हर्षोल्लास के साथ #भादो_माह_की_नवमी_तिथि को हजारों वर्षों से निरंतर धूमधाम से सपरिवार मानते आ रहे हैं। 

दुनिया के महान प्रकृति वैज्ञानिक, कोयापुनेमी, #मुठवा_पहांदी_पारी_कुपार_लिंगो के द्वारा #टोटेमिक व्यवस्था/#कुल_गण्ड व्यवस्था/#गोंदोला व्यवस्था/#बिड़्द व्यवस्था बनाई, इस व्यवस्था के अनुसार प्रकृति को संतुलन बनाए रखने के लिए प्रत्येक गोत्र/कुल समूह को प्रकृति का एक-एक पशु, पक्षी, पेड़-पौधे (वनस्पति जीव) आबंटित किया, इसे ही #कुल_चिन्ह/#टोटम_चिन्ह कहा गया और प्रत्येक कुल समूह अपने टोटम को छोड़कर अन्य पशु, पक्षी, वनस्पति का उपभोग करने का हकदार होता है। एक दूसरे को मना नहीं कर सकते हैं। इस व्यवस्था के अनुसार एक जीव दूसरे जीवों पर आश्रित रहता है। इस तरह प्रकृति संतुलन को बनाए रखने के दृष्टिकोण से #जैव_विविधता या #इको_सिस्टम या #पारिस्थितिक_तंत्र का परिपालन अनिवार्य रूप से होता है। इस व्यवस्था को लिंगों ने सामाजिक रूप से गोंड समुदाय के अतिरिक्त यहां के मूलनिवासियों के व्यवहारिक जीवनदर्शन में ला दिया। आज भी सामाजिक व्यवस्था में निहित है।

नया खानी पर्व जो हजारों वर्षों पूर्व की कुल गण्ड व्यवस्था के समय से प्रत्येक गोत्र/कुल समूह निरंतर मानते आ रहे हैं। कारण यह कि नया खानी पर्व में प्रत्येक गोत्र/कुल समूह अपने-अपने पुरखा पेन या बुड़हाल पेन को प्रकृति का नया फसल को सबसे पहले अर्पित करते हैं तत्पश्चात उस अन्न को सपरिवार ग्रहण करते हैं। पहांदी पारी कुपार लिंगो के द्वारा दुनिया में जब कुल गण्ड व्यवस्था/टोटेमिक व्यवस्था की शुरुआत की, उस समय के प्रथम पुरखा से लेकर आज तक जितने भी हमारे पुर्वज जो वर्तमान में जीवित नहीं है, अब वे पेन रूप में हैं। वे ही अपने-अपने गोत्र/कुल के #बुढ़ा या #बुढ़ाल_पेन हैं। प्रत्येक गोत्र/कुल समूह का अपना-अपना पेनकड़ा, जागा, मंडा होता है, यहीं पर ही हमारे पूर्वज स्थापित रहते हैं। बुढ़ाल पेन में अपने-अपने गोत्र/कुल समूह के पूर्वज शामिल रहते हैं। पेनकड़ा, जागा, मंडा में विशेष अवसरों पर सेवा में इरूक पुंगार (महुआ फूल), महुआ कल (दाड़ंगो/मंद), मुर्गा, सुंअर, बकरा, … इत्यादि दिया जाता है।

प्रत्येक गोत्र/कुल समूह के बुढ़ाल पेन में ही नया खानी के दिन सेवा के समय नौ नग साजा पत्ता (9 नग #मड़दी_आकी) में नया अन्न (नया चिवड़ा) को परिवार का प्रमुख सियान के द्वारा सेवा दिया जाता है। फिर बुढ़ा को महुआ रस तर्पण किया जाता है। परिवार का प्रत्येक घर से बना हुआ उड़द बड़ा या अन्य पकवान को भी बुढ़ा में चढ़ाया जाता है अर्थात दादा के दादा के दादा के…… दादा के जीर्र (डीएनए) को याद करते हुए नया अन्न एवं इरूक पुंगार को अर्पित किया जाता है। कोरई पत्ता (#पालोड़_आकी) में नया अन्न को लेकर परिवार के सभी सदस्य ग्रहण करते हैं। परिवार के सियान-सियानिनों के द्वारा प्रत्येक सदस्य को नया अन्न से टिका लगाकर नया खानी पर्व की बधाई….शुभकामनाएं…. एवं दीर्घायु होने की आशीर्वाद देते हैं। छोटे बच्चों के द्वारा बड़ों का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। एक दूसरे को बधाई देने के बाद परिवार के प्रत्येक घर से बना हुआ उड़द बड़ा, रोटी, चिकन बिरयानी, मटन बिरयानी एवं सुंअर बिरयानी को सपरिवार बैठ कर बड़े हर्षोल्लास के साथ खाते हैं, बड़ों के द्वारा छोटों को नया खानी पर्व के बारे में ज्ञान दिया जाता है, इसका महत्व बताया जाता है और उस रोज दिन भर गांव वालों के साथ कई प्रकार के खेल-खेल का आनंद लेते हैं।

नया खानी के दूसरा दिन #गायता_जोहारनी (ठाकुर जोहारनी) होता है । जिस तरह राष्ट्र का प्रथम व्यक्ति राष्ट्रपति होता है, राज्य का प्रथम व्यक्ति राज्यपाल होता है। नार्र हुजाड़ (गांव व्यवस्था) के अनुसार गांव का प्रथम व्यक्ति #गायता होता है। नार्र गायता के मार्गदर्शन में ही पूरा गांव बसे रहता है, गायता बरसात के पूर्व बीज बोने से पहले वीजा पंडुम और माटी तिहार का निर्धारण किये रहता है। गांव के #जिम्मिदारिन_माया और #तल्लुरमुत्ते_याया की सेवा-अर्जी-विनती, अच्छे फसल होने के लिए किये रहता है। उसी धान के फसल को बुढ़ा में अर्पित करते हैं। इसलिए उसके सम्मान में गांव वालों के द्वारा गायता जोहारनी मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त उस दिन एक दूसरे के गोत्र/कुल समूह के घर परिवार में जोहार भेंट एवं मिलने जाते हैं और बधाई.. शुभकामनाएं.. देते हैं। इस तरह से दो दिन तक मनाया जाने वाला नया खानी एक प्रमुख महापर्व है।

पेन गुड्ड पालोड़ आकी, पुना अनुम तर्रहाना,
जिया जन तुन तुसी, सूलते पुनांग तिन्दना।
बुढ़ाल पेन तुन तर्रहाना, अपुन मानेय तिन्दना,
हरिक मनते मंदाना, सेवा जोहार इन्दाना।।

बुढ़ालपेन ता- सेवा सेवा
जिम्मीदारिन याया ना- सेवा सेवा

मेरे अनुभव के आधार पर नया खानी पर्व का संक्षिप्त जानकारी के साथ आप सभी को वट्टी कुंदा की ओर से पुनः पुनांग तिन्दना पंडुम एवं गायता जोहारनी का बहुत-बहुत बधाई….., शुभकामनाएं…… एवं जोहार….सेवा जोहार…..

✍️✍️✍️ बस्तरिया वट्टी दादी, नार्र-हिचाड़, ब्लॉक-मुरनार्र जिला -कोंडनार्र (छ.ग.), टोटम-गोयहा (पशु), पक्षी-चेचान, वनस्पति-वट माटी, पेनकड़ा-हजोरठेमली, जागा-कसकोंगा, गढ़-हीरागढ़।

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