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हरियाली तीज पर भेटाला में समंदर हिलोराने की रस्म निभाई

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हरियाली तीज पर भेटाला में समंदर हिलोराने की रस्म निभाई

श्रवण लुकड़ /सियाणा

. निकटवर्ती गांव भेटला में सावन माह में हरियाली तीज पर समंदर हिलोराने की रस्म निभाई गई। सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तीज का महत्व महिलाओं के लिए खास है। हरियाली तीज के नाम इस दिन मारवाड़ क्षेत्र में तालाब हिलोरने की रस्में भी निभाई जाती है। जालोर जिले के भेटाला गांव में बुधवार को यह सामाजिक परम्परा निभाई गई। इसके चलते बड़ी संख्या में जन सैलाब उमड़ पड़ा। ढोल बाजों की धुन के साथ सिर पर कलश धारण किए कन्याएं, पुरुषों के सिर पर केसरिया साफा, मंगल गीत गाती महिलाएं और बढ़ते कदम इसी तरह के नजारे इस दौरान दिखे। वहीं सालों का बेसब्री का इंतजार खत्म होने की खुशी भी लोगों में दिखी। हजारों की संख्या में यहां भाई बहनों का रैला उमड़ पड़ा। इससे पूर्व महिलाओं ने विभिन्न परिधानों पर सज-धज कर तालाब के चारों ओर परिक्रमा लगाते हुए विभिन्न गीतों का संगान किया। उन्होंने ओ म्हारा सासुजी समंदरियों हिलोरा खाए,जेठ-आषाढ़ वरिया-वरिया, वीरा दल बादल उजले आदि गीतों का संगान कर पुरानी परंपरा निभाई। इससे पूर्व महिलाएं ने पूरे दिनभर व्रत रखा। गाजे बाजों के साथ पहुंचे भाई -बहन भेटाला गांव के ठाकुर लाख सिंह के घर से गाजे बाजों के साथ भाई बहनों का काफिला रवाना हुआ। ठाकुर लाखसिंह और उनके पुत्र के सानिध्य में सैंकड़ों भाई बहन गीत गाते हुए भेटाला मुख्य सड़क पर स्थित तालाब पर पहुंचे। यहां पर बागरा थानाधिकारी जीतसिंह की सुरक्षाकर्मियों के साथ, पंडित के वैदिक मंत्रोच्चार के साथ तालाब की पूजा अर्चना की। इसी तरह आगे विधि विधान से भाई ने बहन का मटका हिलोरा। तालाब का पानी पिलाया और चुनरी ओढ़ाकर गूंगरी मात्तर खिलाई तथा एक दूसरे की रक्षा करने की कसम खाई। इस दौरान मौजूद लोगों ने तालाब की सात परिक्रमा लगाई।

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